भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)

भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)
Bhavaprakasha Chikitsa Bhaga with Vidyotini Commentary
आचार्य भावमिश्र (टीकाकार: पं. ब्रह्मशंकर मिश्र एवं रूपलालजी वैश्य) द्वारा
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में विश्राम तथा मधुर वार्तालाप, तालाबों में क्रीडा, पित्त का विरेचन एवं जो बलवान् व्यक्ति हो उनका" "रक्तमोक्षण (फस्त खुलवाना) ये सब भी शरद ऋतु में हितकर है और दही, व्यायाम (कसरत), अम्ल, कटु, उष्ण और" "तीक्ष्ण पदार्थों का सेवन, दिन में सोना और ओस तथा घाम का सेवन करना वर्ज्य है ॥३४९॥"
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"इक्ष्वः शालयो मुद्गाः सरोऽम्भः क्वथितं पयः । शरद्येतानि पथ्यानि प्रदोषे चेन्दुरश्मयः ॥३५०॥"
Wait! Is it "इक्ष्वः" or "इक्षवः"?
Look at the first word: `इ` `क` `्` `ष` `्` `व` `ः` -> "इक्ष्वः" or "इक्षवः"?
There is NO virama on ष! It is `इ` `क्ष` `व` `ः` = "इक्षवः"!
Let's look closely: `इ` `क्ष` `व` `ः`. It's definitely "इक्षवः"!
"इक्षवः शालयो मुद्गाः सरोऽम्भः क्वथितं पयः । शरद्येतानि पथ्यानि प्रदोषे