भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)
Bhavaprakasha Chikitsa Bhaga with Vidyotini Commentary
आचार्य भावमिश्र (टीकाकार: पं. ब्रह्मशंकर मिश्र एवं रूपलालजी वैश्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहरीतक्यादिवर्गः ३२७ है। पत्ते-उक्त लहसुन के समान लम्बे, पतले, चिकने और पोले से होते हैं। जड़ से ही अनेक पत्ते निकलते हैं और पत्तों के बीच से दण्ड निकलता है जो एक दो फुट लम्बा, नीचे फूला हुआ किन्तु क्रमशः ऊपर संकुचित और गोल होता है। इसके अन्त में लट्टू के समान फूलों का गुच्छा लगता है। प्रत्येक गुच्छे में लगभग २०० तक नन्हें श्वेत वर्ण के फूल रहते हैं। वे प्याज के फूलों के समान दिखाई पड़ते हैं। इसके कन्द में एक ही जावा रहती है तथा यह कोमल प्याज की तरह दिखलाई देता है। गुण और प्रयोग-इसके गुण लहसुन की तरह ही होते हैं लेकिन विशेष कर यह वृष्य है। वाजीकरण के लिये इसको घी में भून कर मधु के साथ सेवन कराया जाता है। कर्णशूल में इसका टुकड़ा कान के अन्दर रखते हैं। इसके उपयोग से आर्तव शुद्धि होती है। नोट-प्याज की तरह लाल रंग का एक और जंगली लहसुन होता है जो ईरान में अधिक होता है। उसे ले० में-एलियम् लेप्टोफाइलम्, वॉल (Allium leptophyllum, Wall.), ईरान में-सीर-इ-पिआझक् एवं अरब में-थूम-एल-बरी कहा जाता है। गुण और प्रयोग-यह स्वेदल होता है। इसका अचार कुपचन में व्यवहार में लाया जाता है। अथ पालाण्डुः (पियाज), तस्य नामगुणानाह पलाण्डुर्यवनेष्टश्च दुर्गन्धो मुखदूषकः। पलाण्डुस्तु बुधैर्ज्ञेयो रसोनेसदृशो गुणैः ।।२२६।। स्वादुः पाके रसेऽनुष्णः कफकृन्नातिपित्तल। हरते केवलं वातं बलवीर्यकरो गुरुः ।।२२७।। पियाज के नाम तथा गुण-पलाण्डु, यवनेष्ट, दुर्गन्ध और मुखदूषक ये सब पियाज के नाम हैं। पियाज को गुणों में लहसुन के समान समझना चाहिये। पियाज-रस तथा पाक में मधुर रस युक्त, अनुष्ण (ईषत् उष्णवीर्य) एवं