भारतकोश
भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)

भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)

Bhavaprakasha Chikitsa Bhaga with Vidyotini Commentary

आचार्य भावमिश्र (टीकाकार: पं. ब्रह्मशंकर मिश्र एवं रूपलालजी वैश्य) द्वारा

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कर्पूरादिवर्गः . ३८९ (५) गर्भपात रोकने के लिये इसे जल में घिस कर पिलाते हैं। चरक एवं सुश्रुत ने इसे गर्भस्थैर्यकर नहीं माना है। (६) जननेन्द्रिय की शुष्क कण्डू में इसे शीतल जल में घिसकर लगाते हैं। शुष्क कण्डू युक्त त्वचा के रोगों में इसके लेप से त्वचा शुद्ध होकर कान्ति बढ़ती है। मात्रा—५-१५ र०। इसमें तीव्र विषैला द्रव्य होने के कारण भली प्रकार विचार करके इसका प्रयोग करें। अथ गुग्गुलु । तस्य नामान्याह गुग्गुलुर्देवधूपश्च जटायुः कौशिकः पुरः । कुम्भोलूखलकं क्लीवे महिषाक्षः पलङ्कषः ।। ३२ ।। गूगल के नाम—गुग्गुलु, देवधूप, जटायु, कौशिक, पुर, कुम्भोलूखलक (नपुंसकलिङ्ग), महिषाक्ष और पलङ्कष ये सब गूगल के संस्कृत नाम हैं। [३२] गुग्गुलुभेदानाह महिषाक्षो महानीलः कुमुदः पद्म इत्यपि । हिरण्यः पञ्चमो ज्ञेयो गुग्गुलोः पञ्च जातयः ।। ३३ ।। गूगल के भेद—(१) महिषाक्ष, (२) महानील, (३) कुमुद, (४) पद्म, (५) हिरण्य इस प्रकार से गूगल के पाँच भेद जानना चाहिये। [३३] तेषां लक्षणानि गुणाँश्चाह भृङ्गाञ्जनसवर्णस्तु महिषाक्ष इति स्मृतः । महानीलस्तु विज्ञेयः स्वनामसमलक्षणः ।। ३४ ।। कुमुदः कुमुदाभः स्यात्पद्मो माणिक्यसन्निभः । हिरण्याख्यस्तु¹ हेमाभः पञ्चानांलिङ्गमीरितम् ।। ३५ ।। महिषाक्षो महानीलो गजेन्द्राणां हितावुभौ । हयानां कुमुदः पद्मः स्वस्त्यारोग्यकरौ परौ ।। ३६ ।। विशेषेण मनुष्याणां कनकः परिकीर्त्तितः । कदाचिन्महिषाक्षश्च मतः कैश्चिन्नृणामपि ।। ३७ ।। क्रम से उन्हीं ५ प्रकार के गूलों के लक्षण एवं गुण—(१) जो गूगल भौंरा या स्रोतोंजन के समान काले रङ्ग का होता है वह 'महिषाक्ष' कहलाता है। (२) महानील नामक गूगल का लक्षण अपने नाम के अनुरूप ही है अर्थात् वह अत्यन्त नीलवर्ण का होता है। (३) कुमुद नामक गूगल—कुमुद (कुई) पुष्प के समान वर्ण वाला होता है। (४) पद्म नामक गूगल—मानिक के समान वर्ण वाला होता है। (५) हिरण्याख्य गूगल—सोने के समान वर्ण वाला होता है। इनमें से महिषाक्ष तथा महानील ये दोनों गूगल हाथियों के लिये हितकारी होते हैं। कुमुद तथा पद्म ये दोनों गूगल घोड़ों के लिये अत्यन्त कल्याणकारक तथा आरोग्यदायक होते हैं। कनक अर्थात् हिरण्यनामक गूगल तो विशेष करके मनुष्यों के लिये हितकर होता है। कोई-कोई ऐसा भी कहते हैं कि मनुष्य के लिये कहीं-कहीं महिषाक्ष गूगल भी हितकारी होता है। [३४-३७] सामान्यतो गुग्गुलुगुणानाह गुग्गुलुर्विशदस्तिक्तो वीर्योष्णः पित्तलः सरः । कषायः कटुकः पाके कटू रूक्षो लघुः परः ।। ३८ ।। भग्नसन्धानकृद् वृष्यः सूक्ष्मः स्वर्यो रसायनः । दीपनः पिच्छिलो बल्यः कफवातव्रणापचीः ।। ३९ ।। मेदोमेहाश्मवातांश्च क्लेदकुष्ठाममारुतान् । पिडकाग्रन्थिशोफार्शोगण्डमालाकृमीञ्जयेत् ।। ४० ।। माधुर्याच्छमयेद्वातं कषायत्वाच्च पित्तहा । तिक्तत्वाद् कफजित्तेन गुग्गुलुः सर्वदोषहा ।। ४१ ।। १. 'हिरण्याक्षस्तु' इति पाठ०। CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA