भारतकोश
भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)

भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)

Bhavaprakasha Chikitsa Bhaga with Vidyotini Commentary

आचार्य भावमिश्र (टीकाकार: पं. ब्रह्मशंकर मिश्र एवं रूपलालजी वैश्य) द्वारा

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गुडूच्यादिवर्गः ४६३ अथ शालपर्णी (सरिवन) तस्या नामानि गुणाँश्चाह शालपर्णी१ स्थिरा सौम्या त्रिपर्णी पीवरी गुहा । विदारिगन्धा दीर्घाङ्गी२ दीर्घपत्राऽशुमत्यपि ॥३१॥ शालपर्णी गुरुश्छर्दिज्वरश्वासातिसारजित् ।।३२।। शोषदोषत्रयहरी बृंहण्युक्ता रसायनी । तिक्ता विषहरी स्वादुः क्षतकासकृमिप्रणुत् ।।३३।। 'सरिवन' के नाम तथा गुण—शालपर्णी, स्थिरा, सौम्या, त्रिपर्णी, पीवरी, गुहा, विदारिगन्धा, दीर्घाङ्गी, दीर्घपत्रा तथा अंशुमती ये सब संस्कृत नाम 'सरिवन' के हैं। सरिवन—पाक में गुरु और वमन, ज्वर, श्वास, अतिसार, शोष तथा त्रिदोष का नाशक है एवं बृंहण, रसायन, तिक्त तथा मधुर रसयुक्त और विष, क्षयकास तथा कृमि का भी नाशक है। [३१- ३३] १०. शालपर्णी