भारतकोश
भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)

भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)

Bhavaprakasha Chikitsa Bhaga with Vidyotini Commentary

आचार्य भावमिश्र (टीकाकार: पं. ब्रह्मशंकर मिश्र एवं रूपलालजी वैश्य) द्वारा

DevanagariHindipublished1,167 पृष्ठ

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पृष्ठ 549

४९८ भावप्रकाशनिघण्टुः विभिन्न ग्रन्थों में निम्नलिखित विभिन्न वनस्पतियों का पर्पट नाम से उल्लेख है :— (१) Oldenlandia corymbosa, Linn. Fam.; Rubiaceae (ओल्डेन्लेण्डिआ कोरिम्बोसा, लिन. रुबिएसी), बं०-खेतपापड़ा। इसका बंगाल में अधिक व्यवहार किया जाता है। श्रीयुत यादवजी ने अपनी पुस्तक में जो नव्य मत दिया है उसे श्री डॉ० देसाई ने इसी वर्ग के हेडिओटिस् बाइफ्लोरा (Hedyotis biflora) के अन्तर्गत किया है। लेकिन डॉ० देसाई ने इसका बंगाली नाम खेतपाप्रा ही लिखा है। श्री डॉ० चोपरा ने खेतपाप्रा का नाम ओ० बाइफ्लोरा, लिन. (O. biflora, Linn.) लिखा है। श्री बापालालजी की पुस्तक में हे० बर्मानिआना (H. burmanniana) का भी उल्लेख है। इन उपर्युक्त नामों से ऐसा मालूम होता है कि ये या तो एक दूसरे के पर्याय हों या एक ही वनस्पति के उपभेदों में से हों। (२) Fumaria indica, Pugsley; Fam. Fumariaceae (फ्युमेरिया इण्डिका, पग्सले, फ्युमेरिएसी), हिं-शाहतराभेद—यह शाहतरा, फ्यु० ऑफिसिनॅलिस् (Fumaria officinalis) का भेद है। इन दोनों का व्यवहार पंजाब, सिंध, राजपुताना, उत्तर प्रदेश और बिहार के वैद्य पर्पट नाम से करते हैं ऐसा श्री यादवजी ने लिखा है। (३) Polycarpea corymbosa, Lam.; Fam. Caryophyllaceae (पॉलिकार्पीआ कोरिम्बोसा, लॅम्, कॅरियोफाइलेसी)। श्री ठा० बलवन्तसिंहजी लिखते हैं कि उत्तर प्रदेश में अनेक स्थानों पर पर्पट के नाम से इसका व्यवहार किया जाता है। (४) (क) Justicia procumbens, Linn.; Fam Acanthaceae (जस्टिसिआ प्रोकम्बेन्स, लिन., एकेन्थेसी)। बम्ब०-घांटी पित्तपापडा। इसे श्री डॉ० चोपरा ने नं० २ का प्रतिनिधि लिखा है। कुछ लोगों ने ज० डिफ्यूजा विल्ड (J. diffusa Wild) को घांटी पित्तपापड़ा माना है। (ख) Rungia repens, Nees.; Fam. Acanthaceae (रंजिआ रिपेन्स, नीज; एकन्थेसी)। श्री यादवजी ने लिखा है कि गुजरात के वैद्य ‘खडसलियो’ नाम से इसका व्यवहार करते हैं। श्री बापालालजी ने नं० ४ (क) को ‘खडसलियो पीतपापडो’ लिखा है। (ग) Rungia parviflora, Nees. (रंजिआ पार्विफ्लोरा, नीज.)—इसका भी ‘खडसलीयो’ नाम से व्यवहार किया जाता है। (घ) Peristrophe bicalyculata Nees.; Fam. Acanthaceae (पेरिस्ट्रोफ बाइकॅलिकुलेटा. नीज. एकेन्थेसी)। श्री डॉ० सखाराम अर्जुन ने ‘बाम्बेड्रग्स’ पुस्तक में इसका ‘घाटीपित्तपापड़ा, नाम से उल्लेख किया है। इसका विशेष वर्णन आगे काकजंघा के अन्तर्गत किया गया है। (५) Glossocardia linearifolia, Cass.; Fam. Compositae (ग्लॉसो-कार्डिआ लिनिएरिफोलिआ, कॅस; कॉम्पोझिटी)। श्री डॉ० देसाई ने इसका ‘पूना’ का नाम पित्तपापडा दिया है तथा अन्य प्रान्तों में भी कहीं-कहीं इसका पित्तपापड़ा के स्थान पर व्यवहार किया जाता है। (६) Mollugo stricta, Linn.; Fam. Ficoidaceae (मोल्युगो स्ट्रिक्टा, लिन.; फिको इडीसी)। श्री डॉ० देसाई ने इसका संस्कृत नाम ‘पर्पटका’ लिखा है। ३७. पर्पट (१) सं०-क्षेत्रपर्पट, पर्पट। हिं०-दमनपापड़ा। बं०-खेतपापड़ा। म०-परिपाठ, पापटी। गु०-परपट। ता०- पर्पदागम। ते०-वेरिनेल्लावेमु। गोआ-पोपटी, कड्डरी। ले०-Oldenanldia corymbosa Linn. (ओल्डेन्लेण्डिआ कोरिम्बोसा लिन.); Fam. Rubiaceae (रुबिएसी)।