भारतकोश
भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)

भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)

Bhavaprakasha Chikitsa Bhaga with Vidyotini Commentary

आचार्य भावमिश्र (टीकाकार: पं. ब्रह्मशंकर मिश्र एवं रूपलालजी वैश्य) द्वारा

DevanagariHindipublished1,167 पृष्ठ

पृष्ठ 553, कुल 1167 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 553

।इसका क्षुप-(क्षुद्र वनस्पति) ३-१० इञ्च ऊँचा होता है। शाखायें-अनेक, पतली, नालीदार या कोणयुक्त होती हैं। पत्ते-अभिमुख या चक्राभास क्रम में निकले हुये, .५-१.७ इञ्च लम्बे तथा प्रायः मांसल होते हैं। पुष्प-सूक्ष्म, हरित या श्वेत होते हैं। फल-आयताकार और तीन पक्षवाला होता है। इसका स्वाद कड़वा होता है। इसका साग बनाकर खाते हैं। गुण और प्रयोग-यह दीपन, आनुलोमिक, विषमज्वरहर एवं आर्तवजनन है। प्रसूता को इसकी साग खिलाई जाती है। इससे भूख बढ़ती है, पाखाना साफ होता है तथा आर्तवशुद्धि होती है। विषमज्वर में भी इसे खिलाते हैं।

अथ निम्बः । तस्य नामानि गुणाँश्चाह

निम्बः स्यात्पिचुमर्दश्च पिचुमन्दश्च तिक्तकः। अरिष्टः पारिभद्रश्च हिङ्गुनिर्यास इत्यपि ।।९३।। निम्बः शीतो लघुर्ग्राही कटुपाकोऽग्निवातनुत्¹। अहृद्यः श्रमहृत्तृट्कासज्वरारुचिकृमिप्रणुत्। व्रणपित