भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)
Bhavaprakasha Chikitsa Bhaga with Vidyotini Commentary
आचार्य भावमिश्र (टीकाकार: पं. ब्रह्मशंकर मिश्र एवं रूपलालजी वैश्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें५३४ भावप्रकाशनिघण्टुः **गुण और प्रयोग—**इसके गुण भी वेदमश्क की तरह ही हैं। इसकी छाल पौष्टिक, ज्वरघ्न तथा नियतकालिकज्वरप्रतिबंधक है। रक्तातिसार, यकृत् एवं प्लीहा तथा कामला में इसके ताजे पत्तों का रस देते हैं। **मात्रा—**छाल ½-१ तो०; रस २-५ तो०; अर्क ५-१० तो०। अथेज्जलः (समुद्रफल इति लोके) तस्य नामगुणानाह इज्जलो हिज्जलश्चापि निचुलश्चाम्बुजस्तथा। जलवेतसवद्वेद्यो हिज्जलोऽयं विषापहः ॥१३८॥ **इज्जल (समुद्रफल) के नाम तथा गुण—**इज्जल, हिज्जल, निचुल और अम्बुज, ये सब पर्यायवाची शब्द हैं। **इज्जल—**गुणों में 'जलवेतस' के ही समान है तथा विशेषतः यह विषनाशक है। [१३८] ६४. इज्जल (समुद्रफल) **हिं०—**इज्जल, इंजर, हिज्जल, समुद्रफल । **बं०—**हिज्जल । **म०—**सत्फल, समुद्रफल । **गु०—**फल । मा०— समंदर फल । **आसा०—**हिंडोल । **सन्ता०—**हिंजल । **कोल०—**सपरुंग । **उरि०—**किजोलो । **ते०—**कणपु, कणिगि । **ता०—**समुद्रपुल्लानि । **क०—**केंपुकणगिन । **मल०—**चरियसंसकरवडि । **ले०—**Barringtonia acutangula (Linn.). Gaertn. (बॅरिंगटोनिआ एक्युटेग्युला, (लिन) गार्ट) । Fam. Lecythidaceae (लेसिथिर्डेसी) । यह प्रायः सब प्रान्तों में पाया जाता है किन्तु बंगाल तथा दक्षिण में अधिक देखने में आता है। इसका वृक्ष— मध्यमाकार का और बारह मास हरा