भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)
Bhavaprakasha Chikitsa Bhaga with Vidyotini Commentary
आचार्य भावमिश्र (टीकाकार: पं. ब्रह्मशंकर मिश्र एवं रूपलालजी वैश्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें६१८ भावप्रकाशनिघण्टुः अर्कपुष्पी के नाम तथा गुण-अर्कपुष्पी, क्रूरकर्मा, पयस्या और जलकामुका ये नाम अर्कपुष्पी के हैं। अर्कपुष्पी-क्रिमि, कफ, प्रमेह और पित्तविकार को दूर करने वाली होती है। [२७१] नोट-अर्कपुष्पी को कुछ लोगों ने जीवन्ती-भेद माना है। रा० नि० में इसके परिचय में 'खण्णेरिति च कथ्यते' लिखा है। गुजराती में निम्नलिखित लता को खरणेर कहा जाता है। जिसके कारण इसे श्री बापालालजी ने अर्कपुष्पी माना है। डल्हण के समय में भी यह संदिग्ध ही रही है। सु० शा० अ० १० में अर्कपुष्पी की टीका में—'अर्कपुष्पी पयस्या अर्कसदृशपयःपुष्पा, श्वेतदूर्वाविशेषां केचिदाहुः, वृक्षजातिमन्थे' लिखा है। दूसरे स्थान पर इसे 'अर्कपुष्पी अर्कपत्रसदृशी लता' लिखा है। १६२. अर्कपुष्पी हिं०-अर्कपुष्पी, मोरन अड़ा, रानी मारपी, छरिव