भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)
Bhavaprakasha Chikitsa Bhaga with Vidyotini Commentary
आचार्य भावमिश्र (टीकाकार: पं. ब्रह्मशंकर मिश्र एवं रूपलालजी वैश्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंगुडूच्यादिवर्गः ६२१ (४) स्तन्यवर्धक रूप में इसका स्वरस पिलाया जाता है। (५) वमन रोकने के लिए इसकी जड़ का प्रयोग किया जाता है। (६) चर्मकील तथा दद्रु पर इसका दूध लगाते हैं। मात्रा—स्वरस १०-२० बूँद; शुष्क चूर्ण २-५ रत्ती। १६६. छोटी दूधी (१) ले०—Euphorbia thymifolia, Linn. (युफोर्बिआ थाइमीफोलिया, लिन.) । Fam. Euphorbiaceae (युफोर्बिएसी)। यह भी भारत के सभी मैदानी एवं छोटे पहाड़ी स्थानों पर एवं काश्मीर में ५५०० फीट तक होती है। इसके पौधे बहुत छोटे ताम्रवर्ण के तथा फैली हुई शाखाओं से युक्त होते हैं। पत्ते—सूक्ष्म, अभिमुख, द्विपंक्ति, तिर्यक् आयताकार या गोल एवं गोलदन्तुर होते हैं। गुच्छीकृत एकाभव्यूह हरित या गुलाबी तथा मृदुरोमश होते हैं। गुण और प्रयोग—यह विशेष रेचक तथा उत्तेजक है। इसका रस दाद तथा अन्य चर्मरोगों में लगाते हैं। कफ एवं पित्त को निकालने के लिये इसका स्वरस दूध के साथ देते हैं। इसकी जड़ अनार्तव में दी जाती है। १६७. छोटी दूधी (२) ले०—Euphorbia microphylla, Heyne (युफोर्बिआ माइक्रोफाइला, हेन); Fam. Euphorbiaceae (युफोर्बिएसी)। यह बंगाल, बुन्देलखण्ड, बिहार तथा प० प्रायद्वीप में होती है। इसका क्षुप भी पहले की तरह होता है। यह श्वेतवर्ण का होता है। पत्ते—कुछ छोटे और कभी-कभी केवल अग्र पर दन्तुर होते हैं। इसमें एकाभव्यूह चिकने होते हैं। गुण और प्रयोग—स्तन्यवर्धक रूप में इसका प्रयोग करते हैं। १६८. छोटी दूधी (३) ले०—Euphorbia hypericifolia, Linn. (युफोर्बिआ हाइपेरिसी फोलिया, लिन.) । Fam. Euphor- biaceae (युफोर्बिएसी) । पं०—हजारदाना । यह भारत के समस्त उष्ण भागों में तथा ४५०० फीट की ऊँचाई तक हिमालय पर होती है। इसका क्षुप—करीब ६-२४ इञ्च बड़ा होता है। पत्ते—आयताकार या कुछ अभिअंडाकार, सूक्ष्म दन्तुर एवं १.७" से छोटे होते हैं। एकाभव्यूह, छोटे, ०.०७ इञ्च बड़े होते हैं। रासायनिक संगठन—इसमें फेनॉलीय द्रव्य, सुगन्धि तैल एवं क्षाराभ होता है। गुण और प्रयोग—यह संग्राही एवं मादक है। (१) बच्चों के उदरशूल में पत्र-स्वरस दूध के साथ देते हैं। (२) शुष्क पत्र का फांट आँव, अतिसार, अत्यार्तव तथा श्वेतप्रदर में देते हैं। (३) इसका दूध चर्मकील पर लगाते हैं। CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA