भारतकोश
भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)

भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)

Bhavaprakasha Chikitsa Bhaga with Vidyotini Commentary

आचार्य भावमिश्र (टीकाकार: पं. ब्रह्मशंकर मिश्र एवं रूपलालजी वैश्य) द्वारा

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६८८ भावप्रकाशनिघण्टुः अथारिष्टकः (रीठा) । तस्य नामानि गुणाँश्चाह अरिष्टकस्तु मङ्गल्यः कृष्णवर्णोऽर्थसाधनः । रक्तबीजः पीतफेनः फेनिलो गर्भपातनः ।। अरिष्टकस्त्रिदोषघ्नो ग्रहजिद् गर्भपातनः ।। ३८ ।। रीठा के संस्कृत नाम—अरिष्टक, मङ्गल्य, कृष्णवर्ण, अर्थसाधन, रक्तबीज, पीतफेन, फेनिल और गर्भपातन ये सब हैं। रीठा—त्रिदोषनाशक, ग्रहबाधा को दूर करने वाला एवम् गर्भ को गिराने वाला है ।। [३८] २०. रीठा हिं०—रीठा। बं०—रीठेगाछ। म०—रीठा, रिठा। गु०—अरीठा। ते०—कुंकुडु। क०—कुकुटे कायि। ता०— पोत्रान कोट्टर। अ०—बुन्दक हिन्दी। फा०—फुन्दुके फारसी। अं०—Soap nut Tree of North India (सोपनट ट्री ऑफ नार्थ इण्डिया)। ले०—Sapindus mukorossi Gaertn. (सेपिण्डस् मुकोरोसी)। Fam. Sapindaceae (सेपिण्डेसी)। उत्तर पश्चिम भारत, बंगाल तथा आसाम में इसके लगाये पेड़ पाये जाते हैं तथा हिमालय में ४००० फीट तक यह होता है। इसका वृक्ष—सुन्दर होता है। पत्ते—संयुक्त, शाखाग्र पर समूहबद्ध एवं पत्रक—१०-१६, २-६ × ३/४-२ १/४ इञ्च बड़े, भालाकार, आयताकार, एकान्तर या न्यूनाधिक विपरीत, तीक्ष्णाग्र या कुंठिताग्र, चिकने एवं आधार पर तिर्यक् होते हैं। पुष्प—मंजरियों में १/४ इञ्च व्यास के एवं श्वेत या बैंगनी रंग के होते हैं। फल—मांसल, पीत या हलके भूरे, कुछ गोलाई लिये हुए, ३/८ इञ्च व्यास के तथा पानी में डालने से फेन उत्पन्न करने वाले होते हैं। इसकी एक जाति से० ट्राइफोलिएट्स् (S. trifoliatus Linn.) दक्षिण तथा पश्चिम भारत में गाँवों के आसपास होती है और बंगाल तथा अन्य स्थानों में लगाये हुए इसके पेड़ पाये जाते हैं। इसमें पत्रक—२-३ जोड़े, ३-७ × १- ४ इञ्च, भालाकार, तीक्ष्णाग्र या लम्बाग्र एवं ऊपर की ओर चमकीले होते हैं। पुष्प—मटमैले श्वेत होते हैं। फल— २-३ खण्ड युक्त, मांसल, कच्चे में रक्ताभ पीत रोमों से आवृत तथा पकने पर चिकना तथा झुर्रीदार होता है। एक अन्य जाति से० इमार्जिनैट्स् (S. emarginatus Vahl.) जिसे पहले से० ट्राइफोलिएट्स् का पर्याय मानते थे अब स्वतन्त्र जाति मानी जाती है। इसके वृक्ष—छायादार होते हैं। पत्रक—२-३ जोड़े, आयताकार या अंडाकार, कभी-कभी अभिलट्वाकार, कुंठित या द्विविभक्त अग्रवाले और २ १/२-६ इञ्च लम्बे होते हैं। पुष्प—श्वेत एवं फल— पकने पर २, ३ खण्डों के होते हैं। रीठे के फलों का उपयोग रेशमी, सूती और मूल्यवान कपड़ों के धोने के लिये किया जाता है। चिकित्सा में