भारतकोश
भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)

भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)

Bhavaprakasha Chikitsa Bhaga with Vidyotini Commentary

आचार्य भावमिश्र (टीकाकार: पं. ब्रह्मशंकर मिश्र एवं रूपलालजी वैश्य) द्वारा

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वटादिवर्गः ७०३ ३७. (क) कालामोखा सं०-कृष्णमोक्षक ? । हिं०-कालामूका, रतनगरुर । बं०-भूतपत्र, भूतकेशी । ले०-Elaeodendron glaucum Pers. (एलिओडेण्ड्रोन् ग्लॉकम्) । Fam. Celastraceae (सिलेस्ट्रेसी) । यह अनेक स्थानों में पाया जाता है तथा बगीचों में लगाया हुआ भी मिलता है । इसके छोटे वृक्ष होते हैं । पत्ते-गहरे हरे रंग के, चिकने, २-६ × १-३ इञ्च बड़े, लट्वाकार, नोकीले, सवृन्त (वृन्त १ इञ्च तक) एवं गोल या नोकीले दाँतों वाले होते हैं । पुष्प-हरित-श्वेत या भूरे; फल-अष्ठिल तथा १/२ इञ्च लम्बे होते हैं । गुण और प्रयोग-इसकी छाल ग्राही एवं शोथघ्न होती है । भूतोन्माद में पत्तियों का धूआँ दिया जाता है जिससे चेतना आती है तथा शिरःशूल में नस्य दिया जाता है । अथ जलशिरीषिका (जलसिरिस-टिण्टिनी-ढाढोन इति च) । तस्य नामानि गुणाँश्चाह शिरीषिका टिण्टिनिका१ दुर्बलाऽम्बुशिरीषिका । त्रिदोषविषकुष्ठार्शोहरी वारिशिरीषिका ।।७१।। ढाढोन के संस्कृत नाम-शिरीषिका, टिण्टिनिका, दुर्बला, अम्बुशिरीषिका तथा वारिशिरीषिका ये सब हैं । ढाढोन-त्रिदोष, विष, कुष्ठ तथा बवासीर को दूर करने वाला होता है । [७१] ३८. जलसिरिस जल शिरीष क्या है इसका निर्णय अभी नहीं किया जा सका है । संभव है शिरीष की तरह का कोई वृक्ष हो जो जल के समीप होता हो । मराठी नाम 'जल शिरसी' यह ट्राइकोडेस्मा झेलेनिकम् (Trichodesma zeylanicum R. BR.) के लिये लिखा हुआ मिलता है । अभी इसके विषय में अधिक अन्वेषण की आवश्यकता है । अथ शमी (छोंकरा) । तस्या नामानि गुणाँश्चाह शमी शक्तुफला तुङ्गा केशहन्त्री शिवाफला । मंगल्या च तथा लक्ष्मीः शमीरः साऽल्पिका स्मृता ।।७२।। शमी तिक्ता कटुः शीता कषाया रेचनी लघुः । कफकासभ्रमश्वासकुष्ठार्शः कृमिजित् स्मृता ।।७३।। शमी के संस्कृत नाम-शमी, शक्तुफला, तुङ्गा, केशहन्त्री, शिवाफला, मङ्गल्या तथा लक्ष्मी ये सब हैं । छोटे शमीवृक्ष का नाम 'शमीर' है । शमी-तिक्त, कटु तथा कषाय रसयुक्त, शीतल, रेचक, लघु एवम्-कफ, कास (खाँसी), भ्रमरोग श्वास, कुष्ठ, अर्श तथा कृमि का नाशक है । [७२-७३] ३९. छोंकर (शमी) हिं०-छोंकर, शमी छिकुर । बं०-शांई । म०-शमी । गु०-खीजड़ो, खमड़ी । ता०-कलिसम्, वण्णि । ते०-जम्मि । पं०-जंड, जंडी । ले०-Prosopis spicigera Linn. (प्रोसोपिस् स्पिसिजेरा) । Fam. Leguminosae (लेग्युमिनोसी) । यह पञ्जाब, सिन्ध, राजपुताना, गुजरात और बुन्देलखण्ड में अधिक होती है और इसको वाटिकाओं में भी लगाते हैं । इसका काँटेदार वृक्ष-छोटा होता है और शाखायें पतली होती हैं । काँटे शंक्वाकार, सीधे तथा कुछ चिपटे होते हैं । पत्ते-द्वि-पक्षवत्, उपपक्ष प्रायः दो जोड़े, विपरीत, १-२ इञ्च लम्बे और उपपक्षों के प्रत्येक जोड़े के बीच में एक- CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammnu. Digitized by S3 Foundation USA