भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)
Bhavaprakasha Chikitsa Bhaga with Vidyotini Commentary
आचार्य भावमिश्र (टीकाकार: पं. ब्रह्मशंकर मिश्र एवं रूपलालजी वैश्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें७१० भावप्रकाशनिघण्टुः अथाम्रावर्त्तः (अमावट) । तस्य लक्षणं गुणाँश्चाह पक्वस्य सहकारस्य पटे विस्तारितो रसः । घर्मशुष्को मुहुर्दत्त आम्रावर्त्त इति स्मृतः ।।१५।। आम्रावर्त्तस्तृषाच्छर्द्दिवातपित्तहरः सरः । रुच्यः सूर्यांशुभिः पाकाल्लघुश्च सं हि कीर्त्तितः ।।१६।। अमावट के लक्षण—पके आम के रस को निकाल, कपड़े पर पसार कर धूप में सुखावे, जब सूख जाय तब उसी पर पुनः रस डाले और सुखावे इसी भाँति सुखाकर जो मोटी पर्त्त तैयार होती है उसी को ‘अमावट’ कहते हैं। अमावट—प्यास, वमन, वात तथा पित्त का नाशक, सारक तथा रोचक होता है। एवं सूर्य के किरणों से सूख कर परिपक्व होने से लघु होता है। [१५-१६] अथाम्रबीजम् (कोइलिया) । तस्य गुणानाह आम्रबीजं कषायं स्याच्छर्द्यतीसारनाशनम् । ईषदम्लञ्च मधुरं तथा हृदयदाहनुत् ।।१७।। आम्रबीज (आम की गुठली की मींगी)—कषाय, मधुर एवं किंचित् अम्ल रस युक्त तथा वमन, अतिसार एवम् हृदय के दाह को दूर करने वाला होता है। [१७] अथाम्रनवपल्लवः । तस्य गुणानाह आम्रस्य पल्लवो रुच्यः कफपित्तविनाशनः ।।१८।। आम के नवीन पल्लव—रुचिकारक तथा कफ और पित्त के नाशक होते हैं। [१८] १. आम हिं०, बं०-आम। म०-आम्बा। गु०-आम्बो। ते०-मामिडिचेट्टु। ता०-मांगाय, मामरं। क०-अंब, अंभ। फा०-अम्बः। अ०-अम्बज। अं०-Mango Tree (मङ्गो ट्री)। ले०-Mangifera indica Linn. (मङ्गीफेरा इण्डिका)। Fam. Anacardiaceae (अॅनेकार्डिएसी)। आम सर्वप्रिय और सर्वप्रसिद्ध फल है। इस देश में कोई ऐसा मनुष्य न होगा जो आम को न जानता हो। इसका वृक्ष-बड़ा होता है और छोटी-छोटी टहनियों के अन्त में पत्ते सघन लगते हैं। माघ-फागुन में आम का बौर होता है और ग्रीष्म ऋतु में फल पकते हैं। फल-किंचित् लम्बाई लिये गोल होता है और उसके भीतर गुद्दी होती है जो गुठली से लिपटी हुई रहती है। आम का वृक्ष इस देश में प्रायः सर्वत्र लगाया हुआ पाया जाता है। संभवतः वन्य अवस्था में यह सिक्किम, आसाम के नंबर जंगल, खासीया पहाड़, सतपुरा पर्वतश्रेणी के नदियों के उद्गम स्थान तथा पश्चिम घाट में पाया जाता है। इसकी दो जाति होती है-बीजू और कलमी। बीजू-बीज से उत्पन्न होता है और कलमी-डालियों में जोड़ कलम कर के उत्पन्न किया जाता है। बीजू-वृक्ष-बड़े-बड़े होते हैं और कलमी के वृक्ष अधिक ऊँचे नहीं होते। ये दोनों ही स्वाद के भेद से अनेक प्रकार के होते हैं। किसी का स्वाद खट्टा, किसी का खट्टा-मीठा और किसी का मीठा होता है। कलमी आम प्रायः सुस्वादु होते हैं और इसी को लोग पसन्द करते हैं। इसके फल भी छोटे और बड़े के भेद से कई प्रकार के होते हैं तथा इनके रंग भी मिश्रित हरे, पीले, गुलाबी अनेक प्रकार के होते हैं। संसार के सब फलों में उत्तम और अधिक गुणकारी आम का ही फल है इसलिये इसको फलों का राजा कहते हैं। कवियों की कल्पना है कि जिस प्रकार स्वर्ग में अमृत है उसी प्रकार पृथ्वी में आम का फल है। इसके फल, मज्जा, पत्ते एवं छाल का उपयोग किया जाता है। रासायनिक संगठन-इसके फल में विटामिन ए, बी, डी एवं अधिक मात्रा में सी पाया जाता है। इसके अतिरिक्त साइट्रिक एसिड एवं अल्प मात्रा में गॅलिक एसिड होता है।