भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)
Bhavaprakasha Chikitsa Bhaga with Vidyotini Commentary
आचार्य भावमिश्र (टीकाकार: पं. ब्रह्मशंकर मिश्र एवं रूपलालजी वैश्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंआम्रादिफलवर्गः ७१७ अथ नारिकेलादीनां शिरोगुणानाह नारिकेलस्य तालस्य खर्जूरस्य शिरांसि तु। कषायस्निग्धमधुरबृंहणानि गुरूणि च।।४२।। नारियल, ताड़ तथा खजूर के शिर (मस्तक पर होने वाला मीठा गूदा) - कषाय तथा मधुर रसयुक्त, स्निग्ध, गुरु एवम् बृंहण (रस-रक्तादिवर्धक) होते हैं। [४२] ९. नारियल हिं० - नारियल, नरियल, गरी, गिरी। बं० - नारिकेल, डाब। म० - (फल) नारली, नारल. (वृक्ष) माड़। गु० - नारि(अ)यल। ते० - टकाई। ता० - तेंगाई, तेन्ना। फा० - जोज हिन्दी नारीयल, नारगील। अ० - नारजिल्। अं० - Coconut (कोकोनट्)। ले० - Cocos nucifera Linn. (कोकस् न्यूसीफेरा)। Fam. Palmea (पामी)। नारियल - यह भारत के उष्ण एवं आर्द्र प्रदेशों, विशेषकर समुद्र, नदी आदि के किनारे लगाया हुआ पाया जाता है। इसका वृक्ष-सीधा या कुछ टेढ़ा, ८० फीट या अधिक ऊँचा आधार की तरफ कुछ मोटा जहाँ से मूल निकलते हैं एवं क्वचित् शाखायुक्त होता है। पत्ते - ६ से १८ फीट लम्बे, पक्षवत् संयुक्त; पत्रक २ से ३ फीट लम्बे, क्रमशः नोकदार एवं कम चौड़े होते हैं। पुष्प - प्रत्येक पत्र के कोण से ४ से ६ फीट लम्बा, नारंग या तृण वर्ण का कोशावृत पुष्प व्यूह निकलता है जिसमें स्त्रीपुष्प नीचे की तरफ संख्या में कम, १ इञ्च लम्बे तथा गोल होते हैं और पुंपुष्प, अधिक, छोटे मधुर गन्ध वाले एवं अग्रभाग पर होते हैं। फल - अंडाकार, त्रिकोण युक्त, ६ से १२ इञ्च लम्बा तथा एक बीज युक्त होता है। फलमिति का बाह्यस्तर मोटा तथा रेशेदार होता है जो कठोर अन्तस्तर को घेरे रहता है। अन्तस्तर के अन्दर बीज रहता है। अन्तस्तर के एक सिरे पर ३ छिद्र रहते हैं जिनमें से किसी एक से बीजोद्भेद के समय अंकुर निकलता है। गरी के अन्दर अपक्व अवस्था में बहुत पानी रहता है किन्तु पक्वावस्था में यह कम हो जाता है। नारियल के अनेक प्रकार (Varieties) होते हैं जिनमें से कुछ के पेड़ छोटे तथा कुछ के ऊँचे रहते हैं। फलों का रंग, आकार तथा संख्या के अनुसार भी अनेक प्रकार पाये जाते हैं। इसके सभी अंगों का उपयोग किया जाता है। रासायनिक संगठन - ताजी १०० ग्राम गरी में आर्द्रता ३६.३, प्रोटीन ४.५, तेल ४१.६, कर्बोज १३, रेशा ३.६, चूना .०१ तथा फास्फोरस .२४ ग्राम और लोह १.७ मि० ग्रा०, विटामिन 'सी' १ मि० ग्रा० 'बी₁', १५ एकक, अत्यल्प 'ए' तथा 'ई' .२ मि० ग्रा० एवं कुछ ताम्र भी रहता है। सूखे गरी में तेल ५७-७५% रहता है जो अन्य तैलों की अपेक्षा अधिक सुपाच्य होता है। इसे आसानी से चर्म सोख लेता है तथा इसमें जल भी पर्याप्त मिल पाता है इसलिए मलहम आदि बनाने में इसका उपयोग करते हैं। डाब (हरा नारियल) के जल में सोडियम् १०५, पोटैशियम ३१२, कैल्शियम २९, मॅग्नेशियम् ३०, लोह .१०, ताम्र .०४, फॉस्फोरस ३७, गंधक २४, क्लोरीन १८३, विटामिन 'सी' २.२-३.७, मि० ग्रा० प्रति १०० ग्राम में एवं विटामिन 'बी' अल्प रहता है। एक डाब में करीब १ औंस तक शर्करा रहती है। इसकी ताजी मीठी ताड़ी में शर्करा बहुत रहती है तथा १०० सी० सी० में विटामिन 'सी' १६-३० मि० ग्रा० रहता है। गुण और प्रयोग - नारियल मधुर, वृष्य, बृंहण, बल्य शीत एवं बस्तिशोधक है। (१) डाब का पानी शीत, मूत्रजनन, तृष्णा निग्रहण एवं ज्वरघ्न है। इसे ज्वर, सोजाक तथा हैजे में देते हैं। (२) इसका तेल केश्य एवं व्रणरोपक