भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)
Bhavaprakasha Chikitsa Bhaga with Vidyotini Commentary
आचार्य भावमिश्र (टीकाकार: पं. ब्रह्मशंकर मिश्र एवं रूपलालजी वैश्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें७५० भावप्रकाशनिघण्टुः गोल एवं ६-८ इञ्च व्यास के फल भी देखने में आते हैं जो पकने पर फीके पीले रंग के होते हैं। इसके गूदी के दाने फीके गुलाबी या श्वेत रंग के होते हैं और स्वाद में मीठे होते हैं। इसके बीजयुक्त, बीजहीन एवं छोटे, बड़े आदि भेद होते हैं। पतले छिलके वाला बंबई का चकोतरा सबसे अच्छा होता है। ग्रेपफ्रूट (Grape fruit) नामक जाति सा. पॅरॅडिसि (C. paradisi) के फल की अपेक्षा ये बड़े, छिलका मोटा तथा कड़ा, गूदा ठोस एवं अलग-अलग फल पेड़ पर लगते हैं। रासायनिक संगठन- छिलके में सुगन्धित तेल पाया जाता है। गुण और प्रयोग- फल पोषक, हृद्य एवं तृषाशामक होता है। इसके पत्ते अपस्मार, कंपवात तथा आक्षेपयुक्त कास में दिये जाते हैं। अथ जम्बीरद्वयम्। तस्य नामानि तत्फलगुणाँश्चाह स्याज्जम्बीरो दन्तशठो जम्भजम्भीरजम्भलाः। जम्भीरमुष्णं गुर्वम्लं वातश्लेष्मविबन्धनुत् ।।१३४।। शूलकासकफोत्क्लेशच्छर्दितृष्णाऽऽमदोषजित् । आस्यवैरस्यहृत्पीडावह्निमान्द्यक्रिमीन् हरेत् ।। स्वल्पजम्बीरिका तद्वत्तृष्णाच्छर्दिनिवारिणी ।।१३५।। जम्बीरीनींबू के संस्कृत नाम- जम्बीर, दन्तशठ, जम्भ, जम्भीर तथा जम्भल ये सब हैं। जमीरीनींबू- उष्ण, गुरु, अम्लरसयुक्त एवम्-वात-कफ-मल का विबन्ध-शूल-कास-कफोरक्लेश-वमन-तृषा- आमसम्बन्धी दोष-मुख की विरासत-हृदय की पीड़ा-अग्नि की मन्दता तथा क्रिमि को दूर करने वाला होता है। छोटा जमीरीनींबू का संस्कृत नाम-स्वल्पजम्बीरिका है। यह यद्यपि गुणों में जमीरीनींबू के समान है परन्तु विशेषतः तृषा तथा वमन का नाशक है। [१३४-१३५] ५३. जमीरीनींबू हिं०- जमीरीनींबू, बड़ानींबू, पहाड़ीकागजी। बं०- जामीरालेंबू, गोंडा लेंबु। **म०-**इड लिंबु। **गु०-**गोदडिया लिंबु, दोडिंगा। **क०-**काडलिम्बे। **ते०-**जांभिर निम्म। **ता०-**पेरिययेलु-मिच्चई। अं०- Lemon (लेमन)। ले०- Citrus limon Linn. (साइट्रस् लिमन)। Fam. Rutaceae (रुटेसी)। उत्तर प्रदेश, मैसूर, मद्रास तथा बंबई में इसे लोग अपने बगीचों में लगाते हैं। इसका **वृक्ष-**झाड़ीदार, छोटा, १०- १२ फीट ऊँचा एवं कंटकित होता है। पर्णवृन्त या तो पक्षहीन रहता है या पक्ष बहुत छोटे होते हैं। **पुष्प-**एकाकी या कभी-कभी युग्म, १।१-२ इञ्च व्यास के होते हैं। **फल-**आयताकार, अंडाकार, अग्र कुछ बाहर निकला हुआ, चमकीले पीले रंग का, छिलका मोटा एवं अन्दर से हलका पीला तथा स्वाद में खट्टा होता है। इसका एक प्रकार पठानकोट के पास गलगल नाम का होता है। अन्य विदेशी प्रकार भी पाये जाते हैं जिनमें बीज नहीं रहता है। रासायनिक संगठन- इसमें विटामिन 'सी' नींबू की अपेक्षा अधिक रहता है। इसके अतिरिक्त विटामिन 'बी' १, कैरोटिन तथा साइट्रिक अम्ल आदि द्रव्य पाये जाते हैं। रस में न्यूमोनिया रोधी तत्त्व एवं तृणाणुनाशक तत्त्व होते हैं। छिलके में सुगंधित तैल एवं तिक्त द्रव्य होता है। गुण और प्रयोग- यह अम्ल, वातकफनाशक, दीपन, पाचन एवं तृष्णा निवारक है। अतिसार, संग्रहणी आदि में इसे देते हैं। इसका शरबत बनाकर पीते हैं तथा अन्य पदार्थों में खटाई के लिये इसका उपयोग किया जाता है। अथ निम्बूकम् (कागजी नींबू)। तस्य नामगुणानाह निम्बूः स्त्री निम्बुकं क्लीबे निम्बूकमपि कीर्त्तितम्। निम्बूकमुष्णं वातलं दीपनं पाचनं लघु ।।१३६।।