भारतकोश
भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)

भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)

Bhavaprakasha Chikitsa Bhaga with Vidyotini Commentary

आचार्य भावमिश्र (टीकाकार: पं. ब्रह्मशंकर मिश्र एवं रूपलालजी वैश्य) द्वारा

DevanagariHindipublished1,167 पृष्ठ

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७५२ भावप्रकाशनिघण्टुः मीठा नींबू-स्वादिष्ट, गुरु, बलकारक, बृंहण (रस-रक्तादिवर्धक), कफ सम्बन्धी रोगों को उत्पन्न करने वाला एवम् वात-पित्त-गले के रोग-विष-रक्तविकार-शोष-अरुचि-तृषा तथा वमन को दूर करने वाला होता है। [१३९-१४०] ५५. मीठा नींबू हिं०-मीठानींबू, शरबती नींबू। बं०-मीठा लेंबू। म०-साखरलंबू। गु०-मीठानिम्बू। ता०-कोलुमिचंगै। ते०-गजनिम्मा। क०-इम्बे। फा०-लिमुने शिरी। अ०-लिमू नेहुलु। अं०-Sweet Lime (स्वीट लाइम्)। ले०-Citrus limettioides Tanaka (साइट्रस् लिमेट्टिओइडिस्)। Fam. Rutaceae (रूटेंसी)। मध्य तथा उत्तरी भारत में इसकी उपज की जाती है। इसका वृक्ष-छोटा तथा कागजी नींबू जैसा होता है। पत्ते-संतरे के पत्ते जितने बड़े किन्तु हलके रंग के तथा तैल ग्रन्थियाँ अधिक स्पष्ट रहती हैं। वृन्त पक्षयुक्त होते हैं। पुष्प-बड़े तथा श्वेत होते हैं। फल-गोल, ३-५ इञ्च व्यास में, हलके पीले या हलके रंग के; छिलका पतला एवं चिकना गुद्दी मधुर या स्वादहीन रहती है। यह बरसात के अंत में फलता है जबकि अन्य नींबू कम मिलते हैं। रासायनिक संगठन-छिलके में जंबीरीनींबू जैसी गंध का तेल होता है। गुण और प्रयोग-फल को कामला तथा ज्वर में देते हैं। इसको लोग खाते भी हैं। ५६. मोसंबी नोट-यद्यपि यह भारत एवं चीन का आदिवासी है तथापि भावप्रकाशकार इसका उल्लेख नहीं करते। इसी प्रजाति का यह उपयोग फल होने के कारण संक्षेप में यहाँ इसका वर्णन किया जा रहा है। हिं०, बं०, म०, गु०-मोंसबी। अं०-Mozambique Orange (मोझंबीक आरेञ्ज); Sweet Orange (स्वीट आरेंज)। ले०-Citrus Sinensis (Linn.) Osbeck. (साइट्रस साइनेन्सिस्)। अनेक प्रान्तों में इसकी उपज की जाती है। इसका वृक्ष-३० फीट तक ऊँचा, फैला हुआ होता है। पर्णवृन्त का पक्ष कम चौड़ा रहता है। फल-गोल, स्वर्णपीत या नारंगी वर्ण का; छिलका मोटा अंदर गुद्दी में चिपका हुआ; गुद्दी पीत, नारंग या रक्ताभ एवं स्वाद मधुर या अम्ल रहता है। रासायनिक संगठन-इसके फल में प्रशीताद विरोधी विटामिन रहता है। फूलों से प्राप्त नेरोली तेल एवं पत्तों से प्राप्त पेटिटग्रेन तेल (Petitgrain oil) का उपयोग सुगंधि इत्रों के लिए करते हैं। गुण और प्रयोग-फल का रस ज्वर, तृष्णा, प्रतिश्याय, क्षुधानाश, पैत्तिक विकार एवं पैत्तिक अतिसार में दिया जाता है। छिलका दीपन एवं बल्य होता है। मुहाँसे पर छिलके को रगड़ने से लाभ होता है। अथ कर्मरङ्गम् (कमरख)। तस्य नामगुणानाह कर्मरङ्गं शिरालं च बृहदम्लं रुजाकरम्। कर्मरङ्गं हिमं ग्राहि स्वाद्वम्लं कफवातहृत् ।। १४१ ।। कमरख के संस्कृत नाम-कर्मरङ्ग, विशाल, बृहदम्ल तथा रुजाकर ये सब हैं। कमरख-स्वादिष्ट तथा अम्ल रसयुक्त, शीतल, ग्राही एवम्-कफ तथा वात को दूर करने वाला होता है ॥ १४१ ॥ ५७. कमरख हिं०-कमरख। बं०-काम रांगा। म०-कमलर, कर्मर। क०-दारेहुलि। गु०-कमरख। ते०-तमर्ता। ता०-तमर्तै। अं०-Carambola (करम्बोला)। ले०-Averrhoa carambola Linn. (एवेहोआ कॅरेम्बोला)। Fam. Oxalidaceae (ऑक्सेलिडेसी)। CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA