भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)
Bhavaprakasha Chikitsa Bhaga with Vidyotini Commentary
आचार्य भावमिश्र (टीकाकार: पं. ब्रह्मशंकर मिश्र एवं रूपलालजी वैश्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें८१८ भावप्रकाशनिघण्टुः सभी भागों में इसकी उपज की जाती है। इसका क्षुप-गूदेदार तथा सीधा होता है। पत्ते आयताकार होते हैं। इसके बीजों को भी भूनकर खाते हैं। रासायनिक संगठन-इसमें प्रोटीन २.९% एवं लोह अधिक मात्रा में (१८.१८ मि० ग्रा० प्रति १०० ग्राम में) रहता है। गुण और प्रयोग-यह शीत, पित्तशामक एवं रक्तपित्तशामक है। इसका साग खाते हैं। ५. लाल मरसा हिं०-लाल मरसा, लाल साग। बं०-डेंगुआ। म०-माठ। क०-दन्तु। ते०-टोटाकुरा। ले०-Amaranthus gangeticus. Linn. (ॲमॅरेन्थस् गॅजेटिकस्) । Fam. Amaranthaceae (ॲमॅरेन्थेसी)। प्रायः सब प्रान्तों के खेतों में इसका रोपण करते हैं। इसका क्षुप-२-३ फुट ऊँचा और हरिताभ या गहरा लाल होता है। पत्ते-उक्त मरसे के आकार वाले, प्रकार के अनुसार किंचित् हरापनयुक्त लाल या नीलापन युक्त लाल अथवा चमकिले लाल रंग के एवं विभिन्न आकारवाले होते हैं। डण्डियों के चारों ओर सघन गुलाबी रंग के बारीक फूलों के गुच्छे लगते हैं। बीज-उक्त मरसा के समान होते हैं। रासायनिक संगठन-इसके कोमल काण्ड में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, खनिज एवं विटामिन 'ए', 'बी$_१$' तथा 'सी' पाये जाते हैं। बीजों में सॅपोनिन् रहता है जो अल्प विषैला रहता है। गुण और प्रयोग-यह रक्तपित्तशामक एवं व्रणरोपण है। अतिसार, रक्तातिसार एवं रक्तप्रदर में इसको देते हैं। व्रण प्रक्षालन एवं मुखपाक में इसका उपयोग करते हैं। अथ तण्डुलीयः (चौलाई) । तस्य नामगुणानाह तण्डुलीयो मेघनादः काण्डेरस्तण्डुलेरकः । भण्डीरस्तण्डुलीबीजो विषघ्नश्चाल्पमारिषः ।।१२।। तण्डुलीयो लघुः शीतो रूक्षः पित्तकफास्रजित् । सृष्टमूत्रमलो रुच्यो दीपनो विषहारकः ।।१३।। चौलाई के संस्कृत नाम-तण्डुलीय, मेघनाद, काण्डेर, तण्डुलेरक, भण्डीर, तण्डुलीबीज, विषघ्न तथा अल्पमारिष ये सब हैं। चौलाई-लघु, शीतल, रूक्ष, मूत्र तथा मल को निकालने वाली, रुचिकारक, अग्निदीपक एवम् पित्त, कफ, रक्तविकार तथा विष को दूर करने वाली होती है। [१२-१३] ६. चौलाई हिं०-चौलाई का शांक, चौराई का साग, कटैली चवलाई। बं०-कांटा नटे। म०-कांटेमाठ। गु०-कांटालो डांभो। क०-मुल्लुहरिवेसोप्पु । ते०-मोला टोटा कुरा। ता०-मुलुक्वोरै। अं०-Prickly Amaranth (प्रिक्ली ॲमॅरेन्थ)। ले०-Amaranthus spinosus Linn. (ॲमॅरेन्थस् स्पाइनोसस्) । Fam. Amaranthaceae (ॲमॅरेन्थेसी) । यह इस देश के प्रायः सब प्रान्तों के खेत, बाग, बगीचों में और बीरान भूमि में आप ही आप उत्पन्न होती है। इसका क्षुप-२ फीट तक ऊँचा और शाखाएँ झाड़ीदार होती हैं। पत्ते-१।।-२ इञ्च लम्बे, चौड़े भालाकार किन्तु नोकरहित होते हैं। पत्तों की जड़ में महीन तीक्ष्ण काँटे होते हैं। काण्ड पर बारीक फूलों के गुच्छे रहते हैं। इनमें से बारीक काले रंग के गोल चमकीले बीज निकलते हैं।