भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)
Bhavaprakasha Chikitsa Bhaga with Vidyotini Commentary
आचार्य भावमिश्र (टीकाकार: पं. ब्रह्मशंकर मिश्र एवं रूपलालजी वैश्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें, तीक्ष्ण और पाक होने पर अम्ल
(खट्टा) हो जाता है ।।२००।।
❖ पीतं निरामम्। नीलं सामम् ।।२००।।
'पीतं' का निराम अर्थात् पाक को प्राप्त हुआ, पीला और 'नीलं' का साम अर्थात् बिना पका हुआ नीला ।।२००।।
एकं पित्तं वातवन्नामस्थानकर्मभेदैः पञ्चविधम्। तेषां पित्तानां नामान्याह-
पाचकं रञ्जकञ्चापि साधकालोचके तथा। भ्राजकञ्चेति पित्तस्य नामानि स्थानभेदतः ।।२०१।।
पित्तों के नाम—स्थान के भेद से पित्त के पाचक, रञ्जक, साधक, आलोचक और भ्राजक ये पाँच नाम हैं ।।२०१।।
अथ पाचकादीना स्थानान्याह-
(Wait, let's verify L31: पाचकादीना स्थानान्याह- or पाचकादीनां? It has no dot over ना: पाचकादीना स्थानान्याह-. Wait, look at ना: there is no dot above it! It really says पाचकादीना स्थानान्याह-).
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