भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)
Bhavaprakasha Chikitsa Bhaga with Vidyotini Commentary
आचार्य भावमिश्र (टीकाकार: पं. ब्रह्मशंकर मिश्र एवं रूपलालजी वैश्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें'शु' then 'क्ल' + आ = 'शुक्ला'! Wait, let's look at the letter: Top: शु Next: क + ल = क्ल + ा = शुक्ला. Yes, it clearly has the 'ल' hook at the bottom of 'क'! So it's printed "शुक्ला".
Line 11: खिचड़ी बनाने की विधि—चावलों में बराबर की दाल मिलाकर यदि जल में पकाई जाय और उसमें Yes.
Line 12: आवश्यकतानुसार सेंधा नमक, अदरख तथा हींग डाल दिया जाय तो सिद्ध होने पर उसे पण्डित लोग संस्कृत में ‘कृशरा’ Yes, quotes: ‘कृशरा’.
Line 13: कहते हैं। Yes.
Line 14: खिचड़ी—शुक्रजनक, बलकारक, गुरु, पित्त तथा कफकारक, देर में हजम होने वाली एवम् बुद्धि बढ़ाने वाली, Yes.
Line 15: विष्टम्भ करने वाली तथा मल एवं मूत्र को कराने वाली होती है। [९-१०] Yes.
Line 16: अथ तापहरी। तस्याः साधनं गुणाँश्चाह Yes.
Line 17: घृते हरिद्रासंयुक्ते माषजा भर्जयेद्वटीम् ॥११॥ Wait, let's check: "माषजा" or "माषजां"? Look at "माषजा": is there an anusvara? No anusvara