भारतकोश
भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)

भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)

Bhavaprakasha Chikitsa Bhaga with Vidyotini Commentary

आचार्य भावमिश्र (टीकाकार: पं. ब्रह्मशंकर मिश्र एवं रूपलालजी वैश्य) द्वारा

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orभृशम् ।? It has a virama on म्: भृशम् ।. Then पाकेऽपि मधुरो ग्राही लघुर्दोषत्रयापहः ।।२५।।`

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कृतान्नवर्गः ८७५ अथ नारिकेरक्षीरी (नारियल की खीर) । तस्याः साधनं गुणाँश्चाह नारिकेरं तनूकृत्य छिन्नं पयसि गोः क्षिपेत् । सितागव्याज्यसंयुक्ते तत्पचेन्मृदुनाऽग्निना ।।१७।। नारिकेरोद्भवा क्षीरी स्निग्धा शीताऽतिपुष्टिदा । गुर्वी सुमधुरा वृष्या रक्तपित्तानिलापहा ।।१८।। नारिकेरक्षीरी (नारियल की खीर) बनाने की विधि-नारियल को छीलकर उसकी गरी के छोटे-छोटे टुकड़ों को साफ चीनी (शक्कर) तथा गाय के घी के साथ उचित मात्रा में दूध में डाल कर मन्द अग्नि से धीरे-धीरे पकावे । जब सिद्ध हो जाय तब उतार ले । इसी को नारियल की खीर कहते हैं । नारियल की खीर-स्निग्ध, शीतल, अत्यन्त पुष्टिकारक, गुरु, मधुर, वीर्यवर्