भारतकोश
भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)

भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)

Bhavaprakasha Chikitsa Bhaga with Vidyotini Commentary

आचार्य भावमिश्र (टीकाकार: पं. ब्रह्मशंकर मिश्र एवं रूपलालजी वैश्य) द्वारा

DevanagariHindipublished1,167 पृष्ठ

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९४४ भावप्रकाशनिघण्टुः मधुखण्ड (शहद से बनी हुई खाँड अथवा शक्कर)—रूक्ष, कफ तथा पित्तनाशक, गुरु, कषाय रसयुक्त, शीतवीर्य एवम्-वमन, अतिसार, तृषा, दाह तथा रक्तविकार को दूर करने वाली होती है। [३२] अथ परिभाषामाह यथा यथैषां नैर्मल्यं मधुरत्वं यथा यथा। स्नेहलाघवशैत्यादि सरत्वञ्च तथा तथा।।३३।। परिभाषा—जैसे-जैसे इन (खांड, बूरा आदि) सब में निर्मलता तथा मधुरता (मिठास) अधिक होती जाती है वैसे- वैसे इनमें, स्निग्धता, लघुता, शीतलता एवम्-सारकता आदि (गुण) भी बढ़ते जाते हैं, अर्थात् निर्मलता तथा मधुरता के अनुसार ही इन सब में स्निग्धता आदि गुण रहते हैं। [३३] इति श्रीमिश्रलटकनतनय श्रीमिश्रभावविरचिते भावप्रकाशे वर्गप्रकरणे इक्षुवर्गः समाप्तः।