भारतकोश
भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)

भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)

Bhavaprakasha Chikitsa Bhaga with Vidyotini Commentary

आचार्य भावमिश्र (टीकाकार: पं. ब्रह्मशंकर मिश्र एवं रूपलालजी वैश्य) द्वारा

DevanagariHindipublished1,167 पृष्ठ

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अनेकार्थनामवर्गः १४७ ५१. श्यामा—अनन्तमूल और प्रियङ्गु। उत्तमा—त्रिफला, सर्वतोभद्रा च। ५२. उत्तमा—त्रिफला और गम्भारी। धान्यम्—धान्याकं, शाल्यादि च। ५३. धान्य—धनिया और शालि (जड़हन) आदि धान्य। सहस्रवीर्या—नीलदूर्वा, महाशतावरी च। ५४. सहस्रवीर्या—हरी दूब और बड़ी शतावर। सेव्यम्—उशीरं, लामज्जकञ्च। ५५. सेव्य—खस और लामज्जक उदुम्बरः—जन्तुफलं, ताम्रञ्च। ५६. उदुम्बर—गूलर और ताँबा। ऐन्द्री—इन्द्रवारुणी, इन्द्राणी¹ च। ५७. ऐन्द्री—इन्द्रायन, निर्गुण्डी और बड़ी इलायची। कटम्भरा—कटुका, श्योनाकश्च। ५८. कटम्भरा—कुटकी और सोनापाठा। क्षारः—यवक्षारः स्वर्जिका च। ५९. क्षारः—जवाखार और सज्जीखार। गण्डीरः—गण्डारी, मञ्जिष्ठा च [ गण्डारी शाकविशेषो 'गण्डानी' इति लोके]। ६०. गण्डीर—गण्डारी शाक (इसे लोक में 'गण्डानी' भी कहते हैं) और मंजीठ। गान्धारी—दुरालभा गन्धपलाशी च। ६१. गान्धारी—धमासा और गन्धपलाशी² (कपूरकचरी)। चित्रा—इन्द्रवारुणी, बृहदन्ती च। ६२. चित्रा—इन्द्रायन और बड़ी दन्ती। तुण्डीकेरी—कार्पासी, बिम्बी च। ६३. तुण्डीकेरी—कपास और कन्दूरी। धीरा—गुडूची, क्षीरकाकोली च। ६४. धीरा—गिलोय और क्षीरकाकोली बालपत्रः—खदिरः, यवासश्च³। ६५. बालपत्र—खैर और जवासा। वारि—बालकम्, उदकञ्च। ६६. वारि—सुगन्धवाला और जल। अङ्गारवल्ली—भार्गी गुञ्जा च। ६७. अङ्गारवल्ली—भारङ्गी और गुंजा (घुँघची)। अमृणालम्—लामज्जकम्, उशीरञ्च। ६८. अमृणाल—लामज्जक और खस। कुण्डली—गुडूची, कोविदारश्च। ६९. कुण्डली—गिलोय और कचनार। गन्धफली—प्रियङ्गु और गन्धफली—प्रियङ्गुः, चम्पककलिका च। ७०. गन्धफली—प्रियङ्गु और चम्पे की कली। दीर्घमूलः⁴—यवासः, शालिपर्णी च। ७१. दीर्घमूल—जवासा और सरिवन। पिच्छिला—शाल्मली शिंशपा च। ७२. पिच्छिला—सेमर और सीसम। पुष्पफलः—कपित्थः, कुष्माण्डश्च। ७३. पुष्पफल—कैथा और पेठा। पोटगलः—नलः, काशश्च। ७४. पोटगल—नरसल और कास। यवफल—कुटजः, वंशश्च। ७५. यवफल—कुड़ा और बांस देवी—मूर्वा, स्पृक्का च। ७६. देवी—मूर्वा और स्पृक्का। विश्वा—शुण्ठी, अतिविषा च। ७७. विश्वा—सोंठ और अतीस। शीतशिव—सैन्धवं, मिश्रेया⁵ च। ७८. शीतशिव—सेन्धा नमक और मिश्रेया। कर्कशः—काम्पिल्यः, कासमर्दश्च। ७९. कर्कश—कबीला और कसौंदी। चर्मकषा—शातला, मांसरोहिणी च। ८०. चर्मकषा—शातला, मांसरोहिणी च। १. भा. प्र. में इन्द्राणी के निर्गुण्डी तथा बृहदेला पर्याय नहीं हैं किन्तु रा. नि. ने दिये हैं। २. कपूरकचरी का गन्धारि का पर्याय भा. प्र. में है, गान्धारी नहीं है। ३. भा. प्र. में यवासा का बालपत्र पर्याय नहीं है किन्तु रा. नि. एवं ध. नि. में है। ४. यवासा और शालापर्णी का दीर्घमूलः पर्याय भा. प्र. में नहीं है किन्तु रा. नि. एवं ध. नि. में यवासा के लिये दीर्घमूलः एवं शालिपर्णी के लिये दीर्घमूला पर्याय मिलते हैं। ५. मिश्रेया के लिये शीतशीव पर्याय भा. प्र. में नहीं है किन्तु ध. नि. एवं रा. नि. में है।