भारतकोश
भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)

भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)

Bhavaprakasha Chikitsa Bhaga with Vidyotini Commentary

आचार्य भावमिश्र (टीकाकार: पं. ब्रह्मशंकर मिश्र एवं रूपलालजी वैश्य) द्वारा

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९४८ भावप्रकाशनिघण्टुः

नन्दिवृक्षः -अश्वत्थभेदः (अधोमुखपत्रशाखी 'वेलिया पीपर' इति लोके), तूणिश्च । ८१. नन्दिवृक्ष-पीपलभेद (अधोमुख पत्ते तथा शाखाओं वाला 'बेलिया पीपर' इस नाम से लोकप्रसिद्ध वृक्ष) और तून । पयः -क्षीरम्, उदकञ्च । ८२. पयः-दूध और जल । रुहा -दूर्वा, मांसरोहिणी १ च । ८३. रुहा-दूब और मांसरोहिणी । सिंही-बृहती, वासा च । ८४. सिंही-बड़ी कटेरी और अडूसा । कतकम्-विड्लवणम् २, निर्मलीफलं च । ८५. कतक-विरियाँ सञ्चर नोन और निर्मली का फल । कण्टकाढ्या-कुब्जकः, शाल्मली च । ८६. कण्टकाढ्या-कूजा और सेमर । यक्षधूपः -सरलनिर्यासः, ३ रालश्च । ८७. यक्षधूप-गन्धाविरोजा और राल । द्राविडी-शटी, सूक्ष्मैला च । ८८. द्राविडी-कचूर और छोटी इलायची । हट्टविलासिनी -हरिद्रा, नखी च । ८९. हट्टविलासिनी-हरदी और नखी । तिलपर्णम् ४ -रक्तचन्दनम्, ग्रन्थिपर्णं च । ९०. तिलपर्ण-लालचन्दन और गठिवन । मधुरः-जीवकः जीवनीयगणश्च । ९१. मधुर-जीवक और जीवनीय गण । लोहद्रावणी ५ -गण्डदूर्वा अम्लवेतसश्च ।

९२. लोहद्रावणी-गाँडरदूब और अमलबेंत । नागिनी-ताम्बूली, नागपुष्पी च । ९३. नागिनी-पान और नागपुष्पी । मृदुरेचनी-त्रिवृत् ६, मार्कण्डिका च । ९४. मृदुरेचनी-निसोत और सनाय । नटः-श्योनाकः, अशोकश्च । ९५. नट-सोनापाठा और अशोक । वनस्पतिः -वटः, नन्दिवृक्षश्च । ९६. वनस्पति-बरगद और बेलियापीपर । मन्दारः -श्वेतार्कः, महानिम्बश्च । ७ ९७. मन्दार-सफेद आक और बकायन । अम्बुजः-कमलम् ८, इज्जलश्च । ९८. अम्बुज-कमल और इज्जल (समुद्र-फल) । कबरी -बर्बरी ९, हिङ्गुपत्री च । ९९. कबरी-बर्बरी (वनतुलसी और हींगपत्री) । कुमारी -घृतकुमारिका, शतपत्री १० च । १००. कुमारी-घीकुवार और गुलाब । वरतिक्तकः-पाठा, पर्पटश्च । १०१. वरतिक्तक-पाठी और पित्तपापड़ा । चित्रकः -एरण्डः, ११ अनलनामा च । १०२. चित्रक-एरण्ड और चिता । यज्ञियः-खदिरः, पलाशश्च । १०३. यज्ञिय-खैर और पलाश । रक्तबीजः -अरिष्टकः, कन्दुंरी १२ च । १०४. रक्तबीज-रीठा और कन्दुंरी । क्षारश्रेष्ठः -पलाशः, मोक्षकश्च । १०५. क्षारश्रेष्ठः-पलाश और मोखा ।


१. मांसरोहिणी का पर्याय अतिरुहा आया है न कि केवल रुहा । ध. नि. में रुहा है । २. विडलवण का पर्याय कृतक है न कि कतक । ३. भा. प्र. में सरलनिर्यास के लिये वृक्षधूप आया है न कि यक्षधूप । ४. मूल में तैलपर्णकम् यह ग्रन्थिपर्ण के लिये पर्याय आया है । ५. गण्डदूर्वा का पर्याय लोहदद्राविणी आया है एवं अम्लवेतस के लिये यह पर्याय नहीं है । ६. त्रिवृत् का रेचनी पर्याय आया है न कि मृदुरेचनी । ७. महानिम्ब के लिये मन्दार पर्याय नहीं है । भा. प्र. में पारिभद्र के पर्याय में भण्डार लिखा हैं । ८. कमल के लिये अंबुज पर्याय अन्य निघण्टुओं में है । ९. बर्बरी के पर्याय में कबरी नहीं मिलता । १०. शतपत्री का पर्याय महाकुमारी आया है न कि कुमारी । ११. एरण्ड का पर्याय चित्रः दिया हुआ है । १२. कन्दुंरी नाम सन्दिग्ध है । रक्तबीज यह अनार का पर्याय अन्य निघण्टु में है । अनार का रक्तपुष्प पर्याय अन्य निघण्टुओं में मिलता है ।