भारतकोश
भविष्य पुराण

भविष्य पुराण

Bhavishya Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariHindipublished654 पृष्ठ

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  • संक्षिप्त भविष्यपुराण *

मुहूर्तमें स्वस्तिवाचन आदि मङ्गल-कृत्य सम्पन्न कर ध्वजको मन्दिरके ऊपर आरूढ़ करे। ध्वजारोहणके समय अनेक प्रकारके वाद्योंको बजाये, ब्राह्मणगण वेद-ध्वनि करें। इस प्रकार देवालयपर ध्वजारोहण कराना चाहिये। ध्वजारोहण करानेवालेकी सम्पत्तिकी सदा वृद्धि होती रहती है और वह परम गतिको प्राप्त करता है। ध्वजरहित मन्दिरमें असुर निवास करते हैं, अतः ध्वजरहित मन्दिर नहीं रखना चाहिये। ध्वजारोहणके समय इन मन्त्रोंको पढ़ना चाहिये— एहोहि भगवन् देव देववाहन वै खग॥ श्रीकरः श्रीनिवासश्च जय ज्ञेरोपशोभित। व्योमरूप महारूप धर्मात्मस्तत्त्वं च वै गतेः॥

सानिध्यं कुरु दण्डेऽस्मिन् साक्षी च ध्रुवतां व्रज। कुरु वृद्धिं सदा कर्तुः प्रासादास्यार्कवल्लभ॥ ॐ एहोहि भगवन्नीश्वरविनिर्मित उपरिचरवायुमार्गानुसारिच्छ्रीनिवास रिपुध्वंस यक्षनिलय सर्वदेवप्रियं कुरु सानिध्यं शान्तिं स्वस्त्ययनं च मे। भयं सर्वविघ्ना व्यपसरन्तु॥

(ब्राह्मपर्व १३८।७३—७६)

स्वच्छ दण्डमें पताकाको प्रतिष्ठित करे तथा पताकाका दर्शन करे। इस प्रकार भक्तिपूर्वक जो रविका ध्वजारोपण करता है, वह श्रेष्ठ भोगोंको भोगकर सूर्यलोकको प्राप्त करता है।

(अध्याय १३८)

साम्बोपाख्यानमें मगोंका वर्णन

साम्बने कहा—नारदजी! आपकी कृपासे मुझे सूर्यभगवान्का प्रत्यक्ष दर्शन प्राप्त हुआ, उत्तम रूप भी प्राप्त हुआ, किंतु मेरा मन चिन्तासे आकुल है, इस मूर्तिका पूजन और रक्षण कौन करेगा? इसे आप बतानेकी कृपा करें।

नारदजी बोले—साम्ब! इस कार्यको कोई भी ब्राह्मण स्वीकार नहीं करेगा, क्योंकि देवपूजा अर्थात् देवधनसे अपना निर्वाह करनेवाले ब्राह्मण देवलक कहे जाते हैं। जो लोग लोभवश देवधन और ब्राह्मणधनको ग्रहण करते हैं, वे नरकमें जाते हैं, अतः कोई भी ब्राह्मण देवताका पूजक नहीं बनना चाहता। तुम भगवान् सूर्यकी शरणमें जाओ और उन्हींसे पूछो कि कौन उनका विधि-विधानसे पूजन करेगा? अथवा राजा उग्रसेनके पुरोहितसे कहो, सम्भव है कि वे इस कार्यको स्वीकार कर लें।

नारदजीकी इस बातको सुनकर जाम्बवतीपुत्र साम्ब उग्रसेनके पुरोहित गौरमुखके पास गये और उन्होंने उन्हें सादर प्रणामकर कहा—‘महाराज!

मैंने सूर्यभगवान्का एक विशाल मन्दिर बनवाया है, उसमें समस्त परिवार तथा परिच्छदों एवं पत्नियोंसहित उनकी प्रतिमा स्थापित की है और अपने नामसे वहाँ एक नगर भी बसाया है। आपसे मेरा यह विनम्र निवेदन है कि आप उन्हें ग्रहण करें।’

गौरमुखने कहा—साम्ब! मैं ब्राह्मण हूँ और आप राजा हैं। आपके द्वारा दिये गये इस प्रतिग्रहको लेनेपर मेरा ब्राह्मणत्व नष्ट हो जायगा। दान लेना ब्राह्मणका धर्म है, किंतु देवप्रतिग्रह ब्राह्मणको नहीं लेना चाहिये। आप यह दान किसी मगको दे दें, वही सूर्यदेवकी पूजाका अधिकारी है।

साम्बने पूछा—महाराज! मग कौन हैं? कहाँ रहते हैं? किसके पुत्र हैं? इनका क्या आचार है। आप कृपाकर बतायें।

गौरमुख बोले—मग भगवान् सूर्य (अग्नि) तथा निक्षुभाके पुत्र हैं। पूर्वजन्ममें निक्षुभा महर्षि ऋग्विजहकी अत्यन्त सुन्दर पुत्री थी। एक बार उससे अग्निका उल्लङ्घन हो गया। फलस्वरूप

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