भविष्य पुराण
Bhavishya Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें- ब्राह्मपर्व *
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लिये काले रंगकी दूध देनेवाली गाय देनी चाहिये। जो इस व्रतका एक वर्षतक निरन्तर विधिपूर्वक सम्पादन करता है, वह सभी पापोंसे विनिर्मुक्त हो जाता है एवं सभी कामनाओंसे पूर्ण होकर शाश्वत कालतक सूर्यलोकमें आनन्दित रहता है।
सुमन्तु मुनि बोले—राजन्! इस कृष्ण-षष्ठी-
व्रतको भगवान् सूर्यने अरुणसे कहा था। यह व्रत सभी पापोंका नाश करनेवाला है। भक्तिपूर्वक भगवान् भास्करकी पूजा करनेवाला मनुष्य अमित तेजस्वी भगवान् भास्करके अमित स्थानको प्राप्त करता है।
(अध्याय १६४)
उभयससमी-व्रतका वर्णन
सुमन्तु मुनिने कहा—राजन्! अब मैं आपको धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष इस चतुर्वर्गकी प्राप्ति करानेवाले भगवान् सूर्यके उत्तम व्रतको बतलाता हूँ। पौष मासके उभयपक्षकी सप्तमियोंको जो शालि (धान) गेहूँके आटेसे बने पक्का तथा दूधका रात्रिमें भोजन करता है और जितेन्द्रिय रहता है, सत्य बोलता है तथा दिनभर उपवास करता है, तीनों संध्याओंमें भगवान् सूर्य तथा अग्निकी उपासना करता है, सभी भोग-पदार्थोंका परित्याग कर भूमिपर शयन करता है, मास बीतनेपर ससमीको घृतादिके द्वारा भगवान् सूर्यको स्नान कराता है तथा उनकी पूजा करता है, नैवेद्यमें मोदक, पका दूध तथा पक्का निवेदित करता है, आठ ब्राह्मणोंको भोजन कराता है और भगवान् को कपिला गाय निवेदित करता है, वह कोटि सूर्योंके समान देदीप्यमान उत्तम विमानमें आरूढ़ होकर भगवान् अंशुमालीके परम स्थानको प्राप्त करता है। कपिला गौके तथा उसकी संततियोंके शरीरमें जितने रोम हैं, उतने हजार युग वर्षोंतक वह सूर्यलोकमें प्रतिष्ठा प्राप्त करता
है। अपने इक्कीस कुलोंके साथ वह यथेच्छ भोगोंका उपभोग कर अन्तमें ज्ञानयोगका समाश्रयण कर मुक्त हो जाता है।
राजन्! इस प्रकार मैंने आपको इस संसार-समुद्रसे पार उतारनेवाले सौरधर्ममें मोक्ष-क्रमके उपाय बतलाये। यह विद्वानोंके लिये समाश्रयणीय है।
इसी प्रकार अन्य महिनोंमें (माघसे मार्गशीर्षतक) निर्दिष्ट नियमोंका पालन करते हुए व्रत और भगवान् सूर्यकी पूजा करनेसे विभिन्न कामनाओंकी पूर्ति होती है तथा सूर्यलोककी प्राप्ति होती है।
कुरुन्दन! अहिंसा, सत्य-वचन, अस्तेय, शान्ति, क्षमा, ऋजुता, तीनों कालोंमें स्नान तथा हवन, पृथ्वी-शयन, रात्रिभोजन—इनका पालन सभी व्रतोंमें करना चाहिये। इन गुणोंका आश्रयणकर उत्तम व्रतका आचरण करनेवाले व्यक्तिके सभी पाप और भय नष्ट हो जाते हैं एवं रोगोंका नाश हो जाता है और सभी कामनाओंके अनुरूप फलकी प्राप्ति होती है। इस प्रकारका सूर्यव्रती व्यक्ति अमित तेजस्वी होकर सूर्यलोकको प्राप्त कर लेता है।
(अध्याय १६५)
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