भारतकोश
भविष्य पुराण

भविष्य पुराण

Bhavishya Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariHindipublished654 पृष्ठ

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  • संक्षिप्त भविष्यपुराण *

तथा शालंकायन—ये सभी सूर्य-ध्यानमें तत्पर रहनेवाले महातपस्वी ऋषिगण आपको शान्ति प्रदान करें। सूर्यकी आराधनामें तत्पर ऋषि तथा मुनिकन्याएँ, जो निरन्तर आशीर्वाद प्रदान करनेमें तत्पर रहती हैं, आपको नित्य सिद्धि प्रदान करें।

भगवान् सूर्यकी पूजामें तत्पर दैत्यराजेन्द्र नमुचि, महाबली शङ्कुकर्ण, पराक्रमी महानाथ—ये सभी आपके लिये बल, वीर्य एवं आरोग्यकी प्रासिके लिये निरन्तर कामना करें। महान् सम्पत्तिशाली हयग्रीव, अत्यन्त प्रभाशाली प्रह्लाद, अग्रिमुख, कालनेमि—ये सभी सूर्यकी आराधना करनेवाले दैत्य आपको पुष्टि, बल और आरोग्य प्रदान करें। वैरोचन, हिरण्याक्ष, तुर्वसु, सुलोचन, मुचुकुन्द, मुकुन्द तथा रैवतक—ये सभी सूर्यभक्त आपको पुष्टि प्रदान करें। दैत्यपत्नियाँ, दैत्यकन्याएँ तथा दैत्यकुमार—ये सभी आपकी शान्तिके लिये कामना करें।

नागराजेन्द्र अनन्त, अत्यन्त पीले शरीरवाले, विस्फुरित फणवाले, स्वस्तिक-चिह्ने युक्त तथा अत्यन्त तेजसे उद्दीप्त नागराज तक्षक, अत्यन्त कृष्णवर्णवाले, कण्ठमें तीन रेखाओंसे युक्त, भयंकर आयुधरूपी दंष्ट्रसे समन्वित तथा विषके दर्पसे

बलान्वित महानाग कर्कोटक, पद्मके समान कान्तिवाले, कमलके पुष्पके समान नेत्रवाले, पद्मवर्णके महानाग पद्म, श्यामवर्णवाले, सुन्दर कमलके समान नेत्रवाले, विषरूपी दर्पसे उन्मत्त तथा ग्रीवामें तीन रेखावाले शोभासम्पन्न महानाग शंखपाल, अत्यन्त गौर शरीरवाले, चन्द्रार्धकृत-शेखर, सुन्दर फणोंसे युक्त नागेन्द्र कुलिक (और नागराज वासुकि) सूर्यकी आराधना करनेवाले—ये सभी अष्टनाग महाविषको नष्ट करके आपको निरन्तर अचल महाशान्ति प्रदान करें। अन्तरिक्ष, स्वर्ग, गिरिकन्दराओं, दुर्गों तथा भूमि एवं पातालमें रहनेवाले, भगवान् सूर्यके अर्चनमें आसक्त समस्त नागगण और नागपत्नियाँ, नागकन्याएँ तथा नागकुमार सभी प्रसन्नचित्त होकर आपको सदा शान्ति प्रदान करें।'

जो इस नाग-शान्तिका श्रवण या कीर्तन करता है, उसे सर्पगण कभी भी नहीं काटते और विषका प्रभाव भी उनपर नहीं पड़ता।

तदनन्तर गङ्गादि पुण्य नदियों, यक्षेन्द्रों, पर्वतों, सागरों, राक्षसों, प्रेतों, पिशाचों, अपस्मारादि ग्रहों, सभी देवताओं तथा भगवान् सूर्यसे शान्तिकी कामनाके लिये इस प्रकार प्रार्थना करनी चाहिये—*

  • गङ्गा पुण्या महादेवी यमुना नर्मदा नदी । गौतमी चापि कावेरी वरुणा देविका तथा ॥

सर्वग्रहपति देवं लोकेशं लोकनायकम् ।

पूजयन्ति सदा नद्यः सूर्यसद्भावभाविताः । शान्तिं कुर्वन्तु ते नित्यं सूर्यध्यानेकमानसाः ॥

निरञ्जना नाम नदी शोणश्चापि महानदः । मन्दाकिनी च परमा तथा संनिहिता शुभा ॥

एताश्चान्याश्च बहवो भुविदिव्यन्तरिक्षके । सूर्यार्चनरता नद्यः कुर्वन्तु तव शान्तिकम् ॥

महावैश्रवणो देवो यक्षराजो महर्षिकः । यक्षकोटिपरीवारो यक्षासंख्येयसंयुतः ॥

महाविभवसम्पन्नः सूर्यपादाचने रतः । सूर्यध्यानेकपरमः सूर्यभावेन भावितः ॥

शान्तिं करोतु ते प्रीतः पद्मपत्रायतेक्षणः । मणिभद्रो महायक्षो मणिरत्नविभूषितः ॥

मनोहरेण हारेण कण्ठलग्नैन राजते ।

यक्षिणीयक्षकन्याभिः परिवारितविग्रहः । सूर्यार्चनसमासक्तः करोतु तव शान्तिकम् ॥

सुचिरो नाम यक्षेन्द्रो मणिकुण्डलभूषितः । ललाटे हेमपटलप्रबद्धेन विराजते ॥

बहुयक्षसमाकीर्णो यक्षैर्नमितविग्रहः । सूर्यपूजापरो युक्तः करोतु तव शान्तिकम् ॥

पाञ्चिको नाम यक्षेन्द्रः कण्ठाभरणभूषितः । कुक्कुटेन विचित्रेण बहुरत्नान्वितेन तु ॥

यक्षवृन्दसमाकीर्णो यक्षकोटिसमन्वितः । सूर्यार्चनपरः श्रीमान् करोतु तव शान्तिकम् ॥

भूतराष्ट्रो महातेजा नानायक्षाधिपः खग । दिव्यपट्टः शुक्लच्छत्रो मणिकाञ्चनभूषितः ॥

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