भविष्य पुराण
Bhavishya Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
पृष्ठ 229, कुल 654 में से
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- संक्षिप्त भविष्यपुराण *
शुक्ल पक्षकी सप्तमीको उपवास ग्रहण करना चाहिये। आर्त व्यक्तिके लिये मास और पक्षका नियम नहीं है। रात बीतनेमें जब आधा प्रहर शेष रहे, तब दन्तधावन करना चाहिये। महुएकी दतुवनसे दन्तधावन करनेपर पुत्र-प्राप्ति, भँगैरियासे दुःखनाश, बदरी (बेर) और बृहती (भटकटैया)-से शीघ्र ही रोगमुक्ति, बिल्वसे ऐश्वर्य-प्राप्ति, खैरसे धन-संचय, कदम्बसे शत्रुनाश, अतिमुक्तसे अर्थप्राप्ति, आटरूपक (अडूसा)-से गुरुता प्राप्त होती है। पीपलके दातूनसे यश और जातिमें प्रधानता तथा करवीरसे अचल परिज्ञान प्राप्त होता है, इसमें संदेह नहीं। शिरीषकी दातूनसे विपुल लक्ष्मी और प्रियंगुके दातूनसे परम सौभाग्यकी प्राप्ति होती है।
अभीप्सित अर्थकी सिद्धिके लिये सुखपूर्वक बैठकर वाणीका संयम करके निम्र लिखित मन्त्रसे दातूनके वृक्षकी प्रार्थना कर दातून करे—
वरं त्वामभिजानामि कामदं च वनस्पते। सिद्धिं प्रयच्छ मे नित्यं दन्तकाष्ठ नमोऽस्तु ते ॥
(ब्राह्मपर्व ११३।१३)
‘वनस्पते! आप श्रेष्ठ कामनाओंको प्रदान करनेवाले हैं, ऐसा मैं भलीभाँति जानता हूँ। हे दन्तकाष्ठ! मुझे सिद्धि प्राप्त करायें। आपको नमस्कार है।’
इस मन्त्रका तीन बार जप करके दन्तधावन करना चाहिये।
दूसरे दिन पवित्र होकर भगवान् सूर्यको प्रणाम कर यथेष्ट जप करे। तदनन्तर अग्निमें हवन करे। अपराह्न-कालमें मिट्टी, गोबर और जलसे स्नानकर विधिपूर्वक नियमके साथ शुक्ल वस्त्र धारण कर पवित्र हो, देवाधिदेव दिवाकरकी भक्तिपूर्वक विधिवत् पूजा और गायत्रीका जप करे।
(अध्याय ११३)
स्वप्न-फल-वर्णन तथा उदक-सप्तमी-व्रत
भगवान् सूर्यने कहा—हे खगश्रेष्ठ! व्रतीको चाहिये कि जप, होम आदि सभी क्रियाओंको विधिपूर्वक सम्पन्न कर देवाधिदेव भगवान् सूर्यका ध्यान करता हुआ भूमिपर शयन करे। स्वप्नमें यदि मनुष्य भगवान् सूर्य, इन्द्रध्वज तथा चन्द्रमाको देखे तो उसे सभी समृद्धियाँ सुलभ होती हैं। शृङ्गार, चँवर, दर्पण, स्वर्णालंकार, रुधिरस्त्र तथा केशपातको देखे तो ऐश्वर्यलाभ होता है। स्वप्नमें वृक्षाधिरोपण शीघ्र ऐश्वर्यदायक है। महिषी, सिंहही तथा गौका अपने हाथसे दोहन और इनका बन्धन करनेपर राज्यका लाभ होता है। नाभिका स्पर्श करनेपर दुर्बुद्धि होती है। भेड़ एवं सिंहको तथा जलमें उत्पन्न जन्तुको मारकर स्वयं खानेसे,
अपने अङ्ग, अस्थि, अग्नि-भक्षण, मदिरा-पान, सुवर्ण, चाँदी और पद्मपत्रके पात्रमें खीर खानेपर उसे ऐश्वर्यकी प्राप्ति होती है। द्यूत या युद्धमें विजय देखना सुखप्रद होता है। अपने शरीरके प्रज्वलन तथा शिरोबन्धन देखनेसे ऐश्वर्य प्राप्त होता है। माला, शुक्ल वस्त्र, अश्व, पशु, पक्षीका लाभ और विष्टाका अनुलेपन प्रशंसनीय माना गया है। अश्व या रथपर यात्राका स्वप्न देखना शीघ्र ही संततिके आगमनका सूचक है। अनेक सिर और भुजाएँ देखनेपर घरमें लक्ष्मी आती है। वेदाध्ययन देखना श्रेष्ठ है। देव, द्विज, श्रेष्ठ वीर, गुरु, वृद्ध तपस्वी स्वप्नमें मनुष्यको जो कुछ कहें उसे सत्य ही मानना चाहिये*। इनका दर्शन एवं
- देवद्विजश्रेष्ठवीरगुरुवृद्धतपस्विनः
॥ यद्दन्ति नरं स्वप्ने सत्यमेवेति तद्विदुः ।
(ब्राह्मपर्व ११४।११-१२)
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