भारतकोश
भविष्य पुराण

भविष्य पुराण

Bhavishya Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariHindipublished654 पृष्ठ

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  • ब्राह्मपर्व *

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भगवान् भास्करके व्योम-पूजनकी विधि तथा आदित्य-माहात्म्य

विष्णुभगवान्ने पूछा—हे सुरश्रेष्ठ चतुरानन! अब आप भगवान् आदित्यके व्योम-पूजनकी विधि बतलायें। अष्ट-शृङ्गयुक्त व्योमस्वरूप भगवान् भास्करकी पूजा किस प्रकार करनी चाहिये।

ब्रह्माजीने कहा—महाबाहो! सुवर्ण, चाँदी, ताम्र तथा लोहा आदि अष्ट धातुओंसे एक अष्ट शृङ्गमय व्योम बनाकर उसकी पूजा करनी चाहिये। सर्वप्रथम उसके मध्यमें भगवान् भास्करकी पूजा करनी चाहिये। 'महिषा वोः' इस मन्त्रसे अनेक प्रकारके पुष्पोंको चढ़ाना चाहिये। 'त्रातारमिन्द्रः' (यजु० २०।५०) तथा 'उदीरतामवरः' (यजु० १९।४९) इत्यादि वैदिक मन्त्रोंसे शृङ्गोंकी तथा 'नमोऽस्तु सर्पेभ्योः' (यजु० १३।६) इस मन्त्रसे व्योमपीठकी पूजा करनी चाहिये। जो व्यक्ति ग्रहोंके साथ सब पापोंको दूर करनेवाले व्योम-पीठस्थ भगवान् सूर्यको नमस्कार कर उनका पूजन करता है, उसकी सभी कामनाएँ पूर्ण हो जाती हैं, इसमें कोई संदेह नहीं है।

भगवान् भास्करकी पूजा करके गुरुको सुन्दर वस्त्र, जूता, सुवर्णकी अँगूठी, गन्ध, पुष्प, अनेक प्रकारके भक्ष्य पदार्थ निवेदित करने चाहिये। जो व्यक्ति इस विधिसे उपवास रखकर भगवान् सूर्यकी पूजा-अर्चना करता है, वह बहुत पुत्रोंवाला, बहुत धनवान् और कीर्तिमान् हो जाता है। भगवान् सूर्यके उत्तरायण तथा दक्षिणायन होनेपर उपवास रखकर जो व्यक्ति उनकी पूजा करता है,

उसे अश्वमेध-यज्ञ करनेका फल, विद्या, कीर्ति और बहुत-से पुत्रोंकी प्राप्ति होती है। चन्द्रग्रहण और सूर्यग्रहणके समय जो व्यक्ति उपवास रखकर भगवान् भास्करकी पूजा-अर्चना आदि करता है, वह ब्रह्मलोकको प्राप्त होता है।

इसी प्रकार भगवान् भास्करके रत्नमय व्योमकी प्रतिमा बनाकर उसकी प्रतिष्ठा और वैदिक मन्त्रोंसे विविध उपचारोंद्वारा उसकी पूजा करे। पूजनके अनन्तर ऋग्वेदकी पाँच ऋचाओंसे भगवान् आदित्यकी परास्तुति करे*। इसके बाद भास्करको अव्यङ्ग निवेदित करे। अनन्तर भगवान् सूर्यकी दीसा, सूक्ष्मा, जया, भद्रा, विभूति, विमला, अमोघा, विद्युता तथा सर्वतोमुखी नामवाली नौ दिव्य शक्तियोंका पूजन करे।

इस विधिसे जो भगवान् सूर्यकी पूजा करता है, वह इस लोक और परलोकमें सभी मनःकामनाओंको पूर्ण कर लेता है। पुत्र चाहनेवालेको पुत्र तथा धन चाहनेवालेको धन प्राप्त हो जाता है। कन्यार्थीको कन्या और वेदार्थीको वेद प्राप्त हो जाता है। जो व्यक्ति निष्कामभावसे भगवान् सूर्यकी पूजा करता है, उसे मोक्षकी प्राप्ति हो जाती है। इतना कहकर ब्रह्माजी शान्त हो गये।

व्यासजीने पुनः कहा— हे भीष्म! अब आप ध्यान करने योग्य ग्रहोंके स्वरूपका तथा भगवान् आदित्यके माहात्म्यका श्रवण करें। भगवान् सूर्यका वर्ण जपाकुसुमके समान लाल है। वे महातेजस्वी

  • उक्षणं पुश्चिमपञ्चत्त वीरास्तानि धर्माणि प्रथमान्यासन् ॥

चत्वारि वाक् परिमिता पदानि तानि विदुर्ब्राह्मणा ये मनीषिणः । गुहा त्रीणि निहिता नेङ्गयन्ति तुरीयं वाचो मनुष्या वदन्ति ॥ इन्द्रं मित्रं वरुणमनिमामाहुर्यो दिव्यः स सुपर्णां गरुत्मान् । एकं सद् विप्रा बहुधा वदन्त्यग्निं यमं मातरिश्वानमाहुः ॥ कृष्णं नियानं हरयः सुपर्णा अपो वसाना दिवमुत्पत्तन्ति । त आववृत्रन् त्पदनादृतस्यादिद् घूतेन पृथिवी व्युद्यते ॥ यो रत्नधा वसुविद् यः सुदत्रः सरस्वति तमिह धातवे कः ॥

(ऋग्वेद १।१६४।४३, ४५-४७, ४९)

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