भारतकोश
भविष्य पुराण

भविष्य पुराण

Bhavishya Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariHindipublished654 पृष्ठ

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पृष्ठ 235

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  • संक्षिप्त भविष्यपुराण *

श्वेत पद्मपर स्थित हैं। सभी लक्षणोंसे समन्वित हैं। सभी अलंकारोंसे विभूषित हैं। उनके एक मुख है, दो भुजाएँ हैं। रक्त वस्त्र धारण किये हुए वे ग्रहोंके मध्यमें स्थित हैं। जो व्यक्ति तीनों समय एकाग्रचित्त होकर उनके इस रूपका ध्यान करता है, वह शीघ्र ही इस लोकमें धन-धान्य प्राप्त कर लेता है और सभी पापोंसे छूटकर तेजस्वी तथा बलवान् हो जाता है। श्वेत वर्णके चन्द्रमा, रक्त वर्णके मंगल, रक्त तथा श्याम-मिश्रित वर्णके बुध, पीत वर्णके बृहस्पति, शङ्खु तथा दूधके समान श्वेत वर्णके शुक्र, अञ्जनके समान कृष्ण वर्णके शनि, लाजावर्तके समान नील वर्णके राहु और केतु कहे गये हैं। इन ग्रहोंके साथ ग्रहोंके अधिपति भगवान् सूर्यनारायणका जो व्यक्ति ध्यान एवं पूजन करता है, उसे शीघ्र ही महसिद्धि प्राप्त हो जाती है, सभी देवता प्रसन्न हो जाते हैं तथा महादेवत्वकी प्राप्ति हो जाती है।

सूर्यनारायणके समान कोई देवता नहीं और न ही उनके समान कोई गति देनेवाला है। सूर्यके समान न तो ब्रह्मा हैं और न अग्नि। सूर्यके धर्मके समान न कोई धर्म है और न उनके समान कोई धन। सूर्यके अतिरिक्त कोई बन्धु नहीं है और न तो कोई शुभचिन्तक ही है। सूर्यके समान कोई माता नहीं और न तो कोई गुरु ही है। सूर्यके समान न तो कोई तीर्थ है और न उनके समान कोई पवित्र ही है। समस्त लोकों, देवताओं तथा पितरोंमें एक भगवान् सूर्य ही व्याप्त हैं, उनका ही स्तवन, अर्चन तथा पूजन करनेसे परम गतिकी प्राप्ति होती है। जो व्यक्ति भक्तिपूर्वक

सूर्यनारायणकी आराधना करता है, वह इस भवसागरको पार कर जाता है। भगवान् सूर्यके प्रसन्न हो जानेपर राजा, चोर, ग्रह, सर्प आदि पीड़ा नहीं देते तथा दरिद्रता और सभी दुःखोंसे भी निवृत्ति हो जाती है।

रविवारके दिन श्रद्धा-भक्तिपूर्वक भगवान् सूर्यनारायणकी पूजा कर नक्तव्रत करनेवाला व्यक्ति अमरत्वको प्राप्त करता है। भगवान् मार्तण्डकी प्रीतिके लिये जो संक्रान्तिमें विधिपूर्वक श्राद्ध करता है, वह सूर्यलोकको प्राप्त होता है। जो व्यक्ति भास्करकी प्रीतिके लिये उपवास रखकर षष्ठी या सप्तमीके दिन विधिवत् श्राद्ध करता है, वह सभी दोषोंसे निवृत्त होकर सूर्यलोकको प्राप्त कर लेता है। जो व्यक्ति सप्तमीके दिन विशेषकर रविवार अथवा ग्रहणके दिन भक्तिपूर्वक भगवान् भास्करकी पूजा करता है, उसकी सभी मनःकामनाएँ पूर्ण हो जाती हैं। ग्रहणके दिन भगवान् भास्करका पूजन करना उन्हें अतिप्रिय है। भगवान् आदित्य परमदेव हैं और सभी देवताओंमें पूज्य हैं। उनकी पूजा कर व्यक्ति इच्छित फलको प्राप्त कर लेता है। धन चाहनेवालेको धन, पुत्र चाहनेवालेको पुत्र तथा मोक्षार्थीको मोक्ष प्राप्त हो जाता है और वह अमर हो जाता है।

सुमन्तुजीने कहा—राजन्! भीष्मसे ऐसा कहकर वेदव्यासजी अपने स्थानको चले गये और भीष्मने भी श्रद्धा-भक्तिपूर्वक भगवान् सूर्यनारायणकी विधि-विधानसे पूजा की। राजन्! आप भी भगवान् भास्करकी पूजा करें, इससे आपको शाश्वत स्थान प्राप्त होगा। (अध्याय २०३—२०७)

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