भविष्य पुराण
Bhavishya Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
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- संक्षिप्त भविष्यपुराण *
रहते हैं। जैसे सभी देवोंमें सूर्य श्रेष्ठ हैं वैसे ही ब्राह्मणोंमें वाचक श्रेष्ठ है। वाचक व्यास कहा जाता है। जिस देश, नगर, गाँवमें ऐसा व्यास निवास करता है, वह क्षेत्र श्रेष्ठ माना जाता है। वहाँके निवासी धन्य हैं, कृतार्थ हैं, इसमें संदेह नहीं। वाचकको प्रणाम करनेसे जिस फलकी प्राप्ति होती है, उस फलकी प्राप्ति अन्य कर्मोंसे नहीं होती।
जैसे कुरुक्षेत्रके समान कोई दूसरा तीर्थ नहीं, गङ्गाके समान कोई नदी नहीं, भास्करसे श्रेष्ठ कोई देवता नहीं, अश्वमेधके समान कोई यज्ञ
नहीं, पुत्र-जन्मके तुल्य सुख नहीं, वैसे ही पुराणवाचक व्यासके समान कोई ब्राह्मण नहीं हो सकता। देवकार्य, पितृकार्य सभी कर्मोंमें यह परम पवित्र है*।
राजन्! इस प्रकार मैंने पुराणश्रवणकी विधि तथा वाचकके माहात्म्यको बतलाया। विधिके अनुसार ही पुराणादिका श्रवण एवं पाठ करना चाहिये। स्नान, दान, जप, होम, पितृपूजन तथा देवपूजन आदि सभी श्रेष्ठ कर्म विधिपूर्वक अनुष्ठित होनेपर ही उत्तम फल प्रदान करते हैं।
(अध्याय २१६)
॥ भविष्यपुराणान्तर्गत ब्राह्मपर्व सम्पूर्ण ॥
- कुरुक्षेत्रसमं तीर्थं न द्वितीयं प्रचक्षते । न नदी गङ्गा तुल्या न देवो भास्कराद्वरः ॥ नाश्वमेधसमं पुण्यं न पापं ब्रह्महत्या । पुत्रजन्मसुखैस्तुल्यं न सुखं विद्यते यथा ॥ तथा व्याससमो विप्रो न क्वचित् प्राप्यते नृप । दैवे कर्मणि पित्यै च पावनः परमो नृणाम् ॥
(ब्राह्मपर्व २१६।१०९-१११)
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