भारतकोश
भविष्य पुराण

भविष्य पुराण

Bhavishya Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariHindipublished654 पृष्ठ

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  • संक्षिप्त भविष्यपुराण *

शान्तिके लिये रविवारके दिन भगवान् सूर्यकी प्रसन्नता-हेतु उनकी पूजा करे। तिल एवं पायसकी दस हजार आहुतियाँ प्रदान करे। गो-दान करे और ब्राह्मणोंको दक्षिणा दे। इससे शीघ्र शान्ति होती है। अचानक ध्वज, चामर, छत्र तथा सिंहासनसे विभूषित रथपर राजाका दिखलायी देना तथा स्त्री-पुरुषोंकी लड़ाई—ये भी महान् उत्पात हैं। पृथ्वीका काँपना, पहाड़ोंका टकराना, कोयल और उल्लूका रोना आदि सुनायी पड़े तो राजा, मन्त्री, राजपुत्र, हाथी आदि विनष्ट होते हैं।

ताड़ एवं सुपारीके वृक्ष एक साथ उत्पन्न हो जायँ तो उस घरमें रहनेवालोंपर विपत्तिकी सम्भावना होती है। दूसरे वृक्षोंमें अन्य वृक्षोंके फूल-फल लगे हुए दीखें तो ये सोमग्रहजन्य उत्पात है। इसकी शान्तिके लिये सोमवारके दिन सोमके निमित्त दधि, मधु, घृत तथा पलाश आदिसे 'इमं देवाः' (यजु० १।४०) इस मन्त्रसे एक हजार आहुतियाँ दे और चरुसे भी हवन करे।

उड़द और जौकी ढेरियाँ सहसा लुप्त हो जायँ, दही, दूध, घी और पक्कात्रोंमें रुधिर दिखलायी पड़े, एकाएक घरमें आग-जैसा लगना दिखायी दे, बिना बादलके ही बिजली चमकने लगे, घरके सभी पशु तथा मनुष्य रुग्ण-से दिखायी पड़ें तो मङ्गल ग्रहसे उत्पन्न उत्पात समझने चाहिये। इनसे राजा, अमात्य तथा घरके स्वामियोंका विनाश होता है। ऐसे भयंकर उपद्रवोंको देखकर मङ्गलकी शान्तिके लिये दही, मधु, घीसे युक्त खैर और गूलरकी समिधासे 'अग्निर्मूर्धोः' (यजु० ३।१२) इस मन्त्रसे दस हजार आहुतियाँ देनी चाहिये। तीन ब्राह्मणोंको भोजन कराकर दक्षिणामें लाल वस्तुएँ देनी चाहिये तथा सोने या ताँबेकी मङ्गलकी प्रतिमा बनाकर दानमें देनी चाहिये। इससे शान्ति होती है।

गौएँ यदि घरमें पूँछ उठाकर स्वयं दौड़ने लगे और कुत्ते तथा सूअर घरपर चढ़ने लगे तो उस घरकी स्त्रियोंको भीषण क्लेशकी आशंका होती है। गृहस्वामीका पूर्णतः मिथ्यावादी होना तथा राजाका वाद-विवादमें फँसना, घरमें गौओंका चिल्लाना, पृथ्वीका हिलना, घरमें मेढक तथा साँपका जन्म लेना—ये सभी उत्पात बुधग्रहजन्य हैं। इसमें राज्य तथा घरके नष्ट होनेकी सम्भावना होती है। इन उत्पातोंकी शान्तिके लिये बुधवारके दिन बुधग्रहके उद्देश्यसे दही, मधु, घी तथा अपामार्गकी समिधा एवं चरुसे 'उदबुध्चस्वः' (यजु० १५।५४) इस मन्त्रद्वारा दस हजार आहुतियाँ देनी चाहिये। बुधकी सुवर्णकी प्रतिमा तथा पयस्विनी गाय ब्राह्मणको दानमें देनी चाहिये।

पशुओंका असमयमें समागम और उनसे यमल संततियोंकी उत्पत्ति, जौ, ब्रीहि आदिका सहसा लुप्त हो जाना, गृहस्तम्भका सहसा टूटना, आँगनमें बिल्ली तथा मेढकका नखोंसे जमीन कुरेदना और इनका घरपर चढ़ना, ये सभी दोष जहाँ दिखायी दें, वहाँ छः महीनेके भीतर ही घरका विनाश होता है—कोई प्राणी मर जाता है या कुटुम्बमें कलह होता है तथा अनेक व्याधियाँ उत्पन्न होती हैं। बिल्व-वृक्षपर गृध्र और गृध्रीका एक साथ दिखलायी देना राजाके लिये विश्रमकारक तथा प्रासादके लिये हानिकारक होता है। इस दोषसे अमात्यवर्ग राजाके विपरीत हो जाता है। ये सभी बृहस्पतिजनित दोष हैं। इनकी शान्तिके लिये बृहस्पतिके निमित्त शान्ति-होम करना चाहिये तथा पयस्विनी गाय एवं स्वर्णकी बृहस्पतिकी प्रतिमाका दान करना चाहिये।

राक्षसद्वारा घड़ेका जल पीनेका आभास होना; सिंह, शर्करा, तेल, चाँदी, ताण्डवनृत्य, उड़द-

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