भारतकोश
भविष्य पुराण

भविष्य पुराण

Bhavishya Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariHindipublished654 पृष्ठ

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  • संक्षिप्त भविष्यपुराण *

रक्षा करना। फिर तुम बहुत विख्यात व्यक्ति बन जाओगे। भगवान्की बात मानकर उसने एक सुदृढ़ नौकाका निर्माण कराया, जो तीन सौ हाथ लम्बी, पचास हाथ चौड़ी और तीस हाथ ऊँची थी और सभी जीवोंसे समन्वित थी। विष्णुके ध्यानमें तत्पर होता हुआ वह अपने वंशजोंके साथ उस नावपर चढ़ गया। इसी बीच इन्द्रदेवने चालीस दिनोंतक लगातार मेघोंसे मूसलधार वृष्टि करायी। सम्पूर्ण भारत सागरोंके जलसे प्लावित हो गया। चारों सागर मिल गये, पृथ्वी डूब गयी, पर हिमालय पर्वतका बदरी-क्षेत्र पानीसे ऊपर ही रहा, वह नहीं डूब पाया। अट्टासी हजार ब्रह्मवादी मुनिगण, अपने शिष्योंके साथ वहीं स्थिर और सुरक्षित रहे। न्यूह भी अपनी नौकाके साथ वहीं आकर बच गये। संसारके शेष सभी प्राणी विनष्ट हो गये। उस समय मुनियोंने विष्णुमायाकी स्तुति की।

मुनियोंने कहा—‘महाकालीको नमस्कार है, माता देवकीको नमस्कार है, विष्णुपत्नी महालक्ष्मीको, राधादेवीको और रेवती, पुष्पवती तथा स्वर्णवतीको नमस्कार है। कामाक्षी, माया और माताको नमस्कार है। महावायुके प्रभावसे, मेघोंके भयंकर शब्दसे एवं उग्र जलकी धाराओंसे दारुण भय उत्पन्न हो गया है। भैरवि! तुम इस भयसे हम किंकरोंकी रक्षा करो।’ देवीने प्रसन्न होकर जलकी वृद्धिको तुरंत शान्त कर दिया हिमालयकी प्रान्तवर्ती शिषिणा नामकी भूमि एक वर्षमें जलके हट जानेपर स्थलके रूपमें दीखने लगी। न्यूह अपने वंशजोंके साथ उस भूमिपर आकर निवास करने लगा।

शौनकने कहा—मुनीश्वर! प्रलयके बाद इस समय जो कुछ वर्तमान है, उसे अपनी दिव्य दृष्टिके

प्रभावसे जानकर बतलायें।

सूतजी बोले—शौनक! न्यूह नामका पूर्वनिर्दिष्ट म्लेच्छ राजा भगवान् विष्णुकी भक्तिमें लीन रहने लगा, इससे भगवान् विष्णुने प्रसन्न होकर उसके वंशकी वृद्धि की। उसने वेद-वाक्य और संस्कृतसे बहिर्भूत म्लेच्छ-भाषाका विस्तार किया और कलिकी वृद्धिके लिये ब्राह्मी* भाषाको अपशब्दवाली भाषा बनाया और उसने अपने तीन पुत्रों—सीम, शम तथा भावके नाम क्रमशः सिम, हाम तथा याकृत रख दिये। याकृतके सात पुत्र हुए—जुम्र, माजुज, मादी, यूनान, तुवलोम, सक तथा तीरास। इन्हींके नामपर अलग-अलग देश प्रसिद्ध हुए। जुम्रके दस पुत्र हुए। उनके नामोंसे भी देश प्रसिद्ध हुए। यूनानकी अलग-अलग संतानें इलीश, तरलीश, किती और हूदा—इन चार नामोंसे प्रसिद्ध हुईं तथा उनके नामसे भी अलग-अलग देश बसे। न्यूहके द्वितीय पुत्र हाम (शम)-से चार पुत्र कहे गये हैं—कुश, मिश्र, कूज तथा कनआँ। इनके नामपर भी देश प्रसिद्ध हैं। कुशके छः पुत्र हुए—सवा, हबील, सर्वत, उरगम, सवतिका और महाबली निमरूह। इनकी भी कलन, सिना, रोरक, अकृद, बावुन और रसनादेशक आदि संतानें हुईं। इतनी बातें ऋषियोंको सुनाकर सूतजी समाधिस्थ हो गये।

बहुत वर्षोंके बाद उनकी समाधि खुली और वे कहने लगे—‘ऋषियो! अब मैं न्यूहके ज्येष्ठ पुत्र राजा सिमके वंशका वर्णन करता हूँ, म्लेच्छ राजा सिमने पाँच सौ वर्षोंतक भलीभाँति राज्य किया। अर्कन्सद उसका पुत्र था, जिसने चार सौ चौतीस वर्षोंतक राज्य किया। उसका पुत्र सिंहल हुआ, उसने भी चार सौ साठ वर्षोंतक राज्य

  • ब्राह्मीको लिपियोंका मूल माना गया है। राजा न्यूहके हृदयमें स्वयं प्रविष्ट होकर भगवान् विष्णुने उसकी वृद्धिको प्रेरित किया, इसलिये उसने अपनी लिपिको उलटी गतिसे दाहिनेसे बायीं ओर प्रकाशित किया, जो उर्दू, अरबी, फारसी और हिब्रूकी लेखन-प्रक्रियामें देखी जाती है।

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