भविष्य पुराण
Bhavishya Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
पृष्ठ 347, कुल 654 में से
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- संक्षिप्त भविष्यपुराण *
राजपूताना तथा दिल्लीनगरके राजवंशका इतिहास
सूतजी बोले—मुनियो! वयहानि (चपहानि) नामके राजाने मध्यदेशमें अपना आधिपत्य स्थापित किया और ब्रह्माद्वारा रचित अजमेर नामक नगरी बसायी। 'अजमेर' शब्दकी व्युत्पत्तिमें कहा गया है कि 'अज' का अर्थ है—ब्रह्मा, 'मा' का अर्थ है लक्ष्मी। लक्ष्मीने वहाँ आकर ब्रह्माजीके लिये एक रम्य नगरका निर्माण किया। अतः यह अजमेर कहलाया१। वयहानिने दस वर्षतक राज्य किया और उसका पुत्र तोमर हुआ। उसने एक वर्षतक भक्तिपूर्वक भगवान् शिवका पार्थिव-पूजन किया। फलस्वरूप भगवान् शिवने प्रसन्न होकर तोमरको इन्द्रप्रस्थ नामका नगर प्रदान किया। तोमरसे उत्पन्न होनेवाले वंशको तोमर नामक क्षत्रिय-वंश कहा जाता है। तोमरका कनिष्ठ पुत्र हुआ चयहानि (चौहान)। वह चयहानि सामलदेवके नामसे इस पृथ्वीपर प्रसिद्ध हुआ। उसने सात वर्षतक राज्य किया और उसका पुत्र महादेव हुआ। महादेवने अपने पिताके समान राज्य किया और उसका पुत्र हुआ अजय। अजयका पुत्र वीरसिंह हुआ। वीरसिंहने पचास वर्षतक राज्य किया और उसका पुत्र बिंदुसुर हुआ। बिंदुसुरने पचीस वर्षतक मध्यदेशमें राज्य किया और उसे वीरा नामकी एक कन्या हुई तथा वीरविहातक नामका पुत्र हुआ। बिंदुसुरने शास्त्रोक्त रीतिसे अपनी कन्या वीराका विवाह विक्रमसे कर दिया और मध्यदेशवर्ती अपने राज्यको प्रसन्नतापूर्वक अपने पुत्रको दे दिया।
वीरविहातकके माणिक्य नामका पुत्र हुआ। माणिक्यने पिताके समान ही पचास वर्षतक राज्य किया और उसका पुत्र महासिंह हुआ। पिताके समान उसने भी राज्य किया और उसका पुत्र
हुआ चन्द्रगुप्त। चन्द्रगुप्तने पचीस वर्षतक राज्य किया और उसका पुत्र प्रतापवान् हुआ। प्रतापवान्का पुत्र मोहन हुआ। मोहनने तीस वर्षतक राज्य किया और उसका पुत्र श्वेतराय हुआ। श्वेतरायका पुत्र नागवाह हुआ और उसका पुत्र हुआ लोहधार। लोहधारका पुत्र वीरसिंह हुआ, उसका पुत्र विबुध हुआ। विबुधने पचास वर्षतक राज्य किया और उसका पुत्र चन्द्रराय हुआ। चन्द्ररायका पुत्र हरिहर हुआ। उसका पुत्र वसंत, वसंतका पुत्र बलांग और बलांगका पुत्र प्रमथ हुआ। प्रमथका पुत्र अंगराय हुआ और उसका पुत्र विशाल हुआ। विशालका पुत्र शाङ्गदेव और उसका पुत्र मन्त्रदेव हुआ। मन्त्रदेवका पुत्र जयसिंह हुआ। इन सभी राजाओंने पचास-पचास वर्षतक राज्य किया।
जयसिंहने समस्त आर्यदेशको जीतकर वहाँकी धन-सम्पत्तिसे बहुत बड़ा यज्ञ किया, जिससे उसको उत्तम फल प्राप्त हुआ। (इसने ही जयपुर नगर बसाया, जो आज भारतका अत्यन्त रमणीय नगर माना जाता है।) जयसिंहको आनन्ददेव नामक पुत्र उत्पन्न हुआ। बुद्धिमान् जयसिंहने पचास वर्षतक राज्य किया। उसके पुत्र आनन्ददेवने भी अपने पिताके समान ही इस पृथ्वीपर राज्य किया। आनन्ददेवका पुत्र हुआ महान् योद्धा सोमेश्वर। उसने अनंगपालकी ज्येष्ठा पुत्री कीर्तिमालिनीके साथ विवाह किया और उससे तीन पुत्र उत्पन्न हुए। बड़ा पुत्र धृंधुकार मथुराका राजा हुआ। मध्यम पुत्र कृष्णकुमारने पिताके स्थानको प्राप्त किया। तृतीय बलवान् महीराज—पृथ्वीराज दिल्लीपति हुआ। पृथ्वीराजको सहोद्दीन२ नामक राजाने छलसे जीतकर मार डाला और उसने स्वर्ग प्राप्त किया। (अध्याय २)
१-अजस्य ब्रह्मणो मा च लक्ष्मीस्तत्र समागता। तथा च नगरं रम्यमजमेरमतः स्मृतम्॥ (प्रतिसर्गपर्व ४।२।२)
२-सहोद्दीन, शहाबुद्दीन गोरीका संस्कृत रूपान्तर है।
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