भविष्य पुराण
Bhavishya Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
पृष्ठ 351, कुल 654 में से
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- संक्षिप्त भविष्यपुराण *
एक सुन्दर नगर उत्पन्न हुआ। जो कलिकातापुरी (कलकत्ता)-के नामसे इस पृथ्वीपर प्रसिद्ध हुआ*। कालिवर्माका पुत्र कौशिक, उसका पुत्र कात्यायन, उसका पुत्र हेमवत, हेमवतका पुत्र शिववर्मा, शिववर्माका पुत्र भववर्मा और भववर्माका पुत्र रुद्रवर्मा हुआ। इन्होंने भी अपने-अपने पिताके समान राज्य किया। रुद्रवर्माका पुत्र भोजवर्मा हुआ। भोजवर्मोंने अपने पिताका राज्य त्यागकर वनप्रदेशमें भोजराष्ट्रका निर्माण किया। भोजवर्माका पुत्र गववर्मा हुआ और उसका पुत्र विंध्यवर्मा राजा हुआ। विंध्यवर्मा अपने छोटे भाईको राज्य सौंपकर वंग (बंगाल)-देश चला गया। विंध्यवर्माका पुत्र सुखसेन, उसका पुत्र बलाक हुआ। बलाकने दस वर्षतक राज्य किया और उसका पुत्र लक्ष्मण (सेन), उसका पुत्र माधव, उसका पुत्र वेशव और वेशवका पुत्र सुरसेन हुआ। सुरसेनका पुत्र नारायण और नारायणका पुत्र शान्तिवर्मा हुआ।
शान्तिवर्मोंने गङ्गाके किनारे शान्तिपुर नामक एक नगर बसाया और वह वहाँ रहने लगा। शान्तिवर्माका पुत्र नदीवर्मा हुआ और उसका पुत्र महान् बलवान् गंगादत्त हुआ। उसने गौड़ (ठाका) राष्ट्रकी ओर जानेवाली दिशामें नदीहा (नदिया) नामक एक रम्य नगरी बसायी। गंगादत्तने एक विशेषज्ञ विद्याधरको बुलाया। उसीके द्वारा यह वेदपरायणपुरी नदीहा रक्षित थी। राजा गंगादत्तने बीस वर्षतक वहाँ राज्य किया। तभीसे उसके कुलमें उत्पन्न होनेवाले गंगावंशी इस पृथ्वीपर प्रसिद्ध हुए।
गंगादत्तका शाङ्गदेव नामक एक महाबली और
विष्णुभक्त पुत्र हुआ। वह शाङ्गदेव गौड़देशमें जाकर श्रीहरिके ध्यानमें तल्लीन हो गया। शाङ्गदेवने दस वर्षतक राज्य किया और उसका पुत्र गंगादेव हुआ। बीस वर्षतक उसने राज्य किया। गंगादेवका पुत्र अनंग राजा हुआ। बलवान् अनंग गौड़देशका महीपति हुआ। पिताके समान उसने भी राज्य किया। अनंगका पुत्र राजेश्वर, उसका पुत्र नृसिंह और उसका पुत्र कलिवर्मा हुआ। राष्ट्रदेशमें जाकर बलवान् कलिवर्मोंने वहाँके राजाको जीतकर महावती नामक रमणीय पुरीके मध्य सुखपूर्वक राज्य किया। कलिवर्माका पुत्र हुआ धृतिवर्मा। धृतिवर्माका पुत्र महीपति हुआ। जयचन्द्रकी आज्ञासे राजा महीपतिने उर्वीमाया (उर्वीया) नामसे एक प्रसिद्ध नगरीका निर्माण किया और वहाँपर निवास करने लगा। कुरुक्षेत्रमें सभी चन्द्रवंशीय क्षत्रिय राजा मारे गये। तब महीपति महावतीका राजा हुआ। बीस वर्षतक महीपतिने राज्य किया। अनन्तर सहोद्दीनके द्वारा सुयोधनके कलांशसे उत्पन्न जो राजा थे वे सभी कुरुक्षेत्रमें मारे गये। परिहारके पुत्र घोरवर्मोंने कलिंजरमें राज्य किया। उसका पुत्र हुआ शादूल। उसके वंशमें जो राजा हुए वे शादूलीय नामसे प्रसिद्ध हुए। महामायाके प्रसादसे सम्पूर्ण भूमिपर शादूलवंशमें उत्पन्न राजा व्याप्त हो गये।
हे शौनक! इस प्रकार अग्निवंशीय राजाओंके कुलका मैंने वर्णन किया, चन्द्र और सूर्यवंशका स्मरण करनेसे जैसे पाप नष्ट हो जाते हैं, ऐसे ही यह अग्निवंश भी पवित्र करनेवाला है। अब मैं अन्य वंशका वर्णन कर रहा हूँ, जिसमें हरि स्वयं उत्पन्न हुए। (अध्याय ४)
- कलिका बहुपुष्पाणां सा चकार स्वहर्षतः। ताभिर्भवं च नगरं संजातं च मनोहरम् ॥
कलिकाता पुरी नाम्ना प्रसिद्धाभूमहीतले। (प्रतिसर्गपर्व ४।४।१३-१४)
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