भारतकोश
भविष्य पुराण

भविष्य पुराण

Bhavishya Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariHindipublished654 पृष्ठ

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  • संक्षिप्त भविष्यपुराण *

देवताओंके प्रति 'ऐसा ही हो' यह कहेंगे, यह कहकर भगवान् कलिक देवताओंके देखते-देखते वहीं अन्तर्धान होकर सुषुप्त हो जायेंगे।

भगवान् कलिकके जानेके बाद दुःखित भगवती कर्मभूमि विरहाग्रिसे संतप्त बीजोंका नाश कर देंगी। उस समय पातालनिवासी महान् दैत्यगण प्रह्लादके साथ अपने वाहनोंपर आरूढ़ हो अनेक अस्त्र-शस्त्रोंको लेकर देवताओंके पास गरजते हुए जायेंगे। तब इन्द्र आदि तैंतीस देवगण अपने आयुधोंको ग्रहण कर उनसे भयंकर युद्ध करेंगे। दिव्य एक वर्षतक उनका भयंकर युद्ध होगा। मरे हुए दैत्योंको शुक्राचार्य जिला देंगे, तब थके हुए देवगण युद्ध छोड़कर क्षीरसागर चले जायेंगे, जहाँ साक्षात् हरि विराजमान रहते हैं। देवगण उनकी स्तुति करेंगे। उनकी स्तुतिसे वे भगवान् देवताओंके कल्याणके लिये अपने पूर्वार्धसे हंसरूप बना लेंगे। वे हंसरूपी

साक्षात् हरि सैकड़ों सूर्यकी कान्तिके समान प्रभावशाली होंगे। प्रह्लादादि प्रमुख दैत्यगण एवं शुक्राचार्यको वे अपने तेजसे तप्त कर देंगे। तब पराजित दैत्यगण पृथ्वीको छोड़कर दुःखित हो वितललोकमें चले जायेंगे। महादेवसे रक्षित वे सभी देवगण निर्भय, निरुपद्रव हो जायेंगे और पृथ्वीपर वैवस्वतके पुत्रका अभिषेक करेंगे। वे इक्ष्वाकु दिव्य सौ वर्षकी आयुवाले होंगे, उस समय मनुष्यकी आयु चार सौ वर्षकी होगी। धर्मके चार पाद हैं—ज्ञान, ध्यान, शम तथा दम। आत्मज्ञान ज्ञान कहलाता है। अध्यात्मचिन्तन ध्यान कहलाता है। मनकी स्थिरता शम है और इन्द्रियोंका निग्रह करना दम है। चार लाख बत्तीस हजार वर्ष धर्मका एक पाद कहा जाता है। जब धर्मकी वृद्धि होती है, तब आयुकी भी वृद्धि होती है।

(अध्याय २६)

॥ प्रतिसर्गपर्व, चतुर्थ खण्ड सम्पूर्ण ॥ ॥ भविष्यपुराणान्तर्गत प्रतिसर्गपर्व सम्पूर्ण ॥

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