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भविष्य पुराण

भविष्य पुराण

Bhavishya Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariHindipublished654 पृष्ठ

पृष्ठ 629, कुल 654 में से

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पृष्ठ 629

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  • संक्षिप्त भविष्यपुराण *

जो तुमने पूछा, वह मैंने बता दिया। जो स्त्री अथवा पुरुष भुवनप्रतिष्ठा करते हैं, वे कृतकृत्य हो जाते हैं।' इस प्रकार कहकर महातेजस्वी पुलस्त्यजी अपने धामको चले गये।

भगवान् श्रीकृष्ण बोले—राजन्! इस भुवनप्रतिष्ठासे धर्मकी वृद्धि, अभीष्टकी सिद्धि, पापका क्षय और सभी कार्योंकी सिद्धि हो जाती है। (अध्याय १९१)

नक्षत्रदान (नक्षत्रोंमें दानके पदार्थ)

महाराज युधिष्ठिरने कहा—भगवन्! मैंने आपकी कृपासे सभी दान-विधियाँ सुनीं। इस समय आप नक्षत्रोंमें देय दानोंका वर्णन कीजिये।

भगवान् श्रीकृष्ण बोले—महाराज! किसी समय देवर्षि नारद द्वारका आये। उनसे मेरी माता देवकीने नक्षत्रदान-विधि पूछी। उस समय नारदजीने जो उन्हें बतलाया, मैं वही कह रहा हूँ। इससे सब पातक दूर हो जाते हैं।

महाभाग! कृतिका नक्षत्रमें घी और खीरसे युक्त भोजन देकर साधुजनों और ब्राह्मणोंको संतुष्ट करनेसे उत्तम लोककी प्राप्ति होती है। रोहिणी नक्षत्रमें घृतमिश्रित अन्नका ब्राह्मणों तथा साधु-संतोंको भोजन करानेसे श्रेष्ठ लोकोंकी प्राप्ति होती है। मृगशिरा नक्षत्रमें ब्राह्मणोंको दूधका दान करनेसे किसी प्रकारका ऋण नहीं रहता और सवत्सा पयस्विनी गौ ब्राह्मणको दान करनेवाला विमानमें बैठकर स्वर्गलोकमें जाता है। आर्द्रा नक्षत्रमें तिलमिश्रित कृशर (खिचड़ी)-का दान करनेसे मनुष्य सभी प्रकारके संकटोंसे मुक्त हो जाता है। पुनर्वसु नक्षत्रमें घृतपक्व अपूप (मालपूआ) ब्राह्मणको देनेवाला उत्तम कुलमें जन्म लेकर यश, धन और रूप प्राप्त करता है। पुष्य नक्षत्रमें सुवर्णका दान करनेसे दाता पापरहित होकर इस लोक तथा परलोकमें चन्द्रमाकी तरह सुशोभित होता है। आश्लेषा नक्षत्रमें ब्राह्मणोंको चाँदीका दान करे तो निर्भय और शास्त्रको जाननेवाला विद्वान् होता है।

मघा नक्षत्रमें तिलसे भरे हुए घड़ोंका दान करनेसे पुत्र, पशु तथा धनकी प्राप्ति होती है। पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्रमें ब्राह्मणको घोड़ीका दान देनेसे पुण्यलोकमें निवास मिलता है। उत्तराफाल्गुनी नक्षत्रमें सुवर्ण-कमल देनेसे सभी बाधाएँ दूर हो जाती हैं और सूर्यलोककी प्राप्ति होती है।

हस्त नक्षत्रमें सुवर्णका हाथी बनाकर ब्राह्मणको दान देनेसे दिव्य हस्तीपर आरूढ़ होकर इन्द्रलोकमें जानेका सौभाग्य प्राप्त होता है। चित्रा नक्षत्रमें वृषभका दान करनेसे उत्तम पुण्य प्राप्त होता है और अप्सराओंके नन्दनवनमें विहार करनेका अवसर प्राप्त होता है। स्वाती नक्षत्रमें जो पदार्थ स्वयंका प्रिय हों, उनका दान करनेसे बहुत यश मिलता है और अन्तमें सद्गति मिलती है। विशाखा नक्षत्रमें धान्य एवं वस्त्रसहित सुदृढ़ बैलगाड़ीका दान करनेसे पितृगणोंको प्रसन्नता होती है, संसारमें कोई कष्ट नहीं होता और दान देनेवाला सभी प्रकारके पापोंसे छूटकर उत्तम गति प्राप्त करता है। अनुराधा नक्षत्रमें यथाशक्ति कम्बल और ओढ़ने तथा पहिनेवाले उत्तरीय वस्त्र आदि ब्राह्मणको दान देनेसे दिव्य सौ वर्षसे भी अधिक समयतक स्वर्गमें देवताओंके समीप निवास करनेका अवसर प्राप्त होता है।

ज्येष्ठा नक्षत्रमें विविध प्रकारके कालशाक (करोमू) तथा मूली आदि शाक ब्राह्मणोंको देनेसे अभीष्ट गति प्राप्त होती है। मूल नक्षत्रमें ब्राह्मणोंको

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