भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१२३ 'वृष' लग्न
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[ 'वृष' लग्न की कुण्डलियों के विभिन्न भावों में स्थित विभिन्न ग्रहों के फलादेश का पृथक्-पृथक् वर्णन ] 'वृष' लग्न का फलादेश 'वृष' लग्न में जन्म लेने वाले जातक के शरीर का रंग गोरा अथवा गेहुँआ होता है। वह पुष्ट शरीर, लम्बे दाँत वाला, रजोगुणी, गुणवान, यशस्वी, बुद्धिमान, परम धैर्यवान, शूरवीर, साहसी, मधुरभाषी, यशस्वी, ईश्वरभक्त, ऐश्वर्यशाली, उदार, श्रेष्ठ संगति में बैठने वाला, कुंचित केशों वाला, दीर्घजीवी, शौकीन-मिजाज तथा स्त्रियो जैसे नाजुक-मिजाज वाला भी होता है। यह प्रकृति से अत्यन्त शान्त होता है, परन्तु अवसर पड़ने पर युद्ध अथवा संघर्ष में अपना प्रबल पराक्रम भी प्रकट कर दिखाता है। 'वृष' लग्न वाला जातक अपने परिवारीजनों से अनादृत, शस्त्राघात पाने वाला, धन-क्षय-युक्त, मित्र-वियोगी, कलह-युक्त, चिन्ताओं से पीड़ित, मानसिक-रोगी, तथा मन-ही-मन दुःखी रहने वाला भी होता है। कुछ विद्वानों के मतानुसार 'वृष' लग्न वाला जातक अपनी आयु के ३६वें वर्ष के बाद अनेक प्रकार के कष्टों को भी भोगता है। 'वृष' लग्नवालों को अपनी जन्मकुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित विभिन्न ग्रहों का स्थायी-फलादेश आगे दी गई उदाहरण-कुण्डलियों में संख्या २७५ से ३३२ के बीच देखना चाहिए। गोचर-कुण्डली के ग्रहों का फलादेश किन उदाहरण-कुण्डलियों में देखें। इसे आगे लिखे अनुसार समझ लेना चाहिए।