भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१२७ 'शुक्र' का स्थायी-फलादेश उदाहरण-कुण्डली संख्या २८५ से २९६ के बीच देखना चाहिए। २—'वृष' लग्न वालों को गोचर-कुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'शुक्र' का अस्थायी-फलादेश निम्नलिखित उदाहरण-कुण्डलियों में देखना चाहिए— जिस महीने में 'शुक्र'— (क) 'मेष' राशि पर हो तो संख्या २८५ (ख) 'वृष' राशि पर हो तो संख्या २८६ (ग) 'मिथुन' राशि पर हो तो संख्या २८७ (घ) 'कर्क' राशि पर हो तो संख्या २८८ (ङ) 'सिंह' राशि पर हो तो संख्या २८९ (च) 'कन्या' राशि पर हो तो संख्या २९० (छ) 'तुला' राशि पर हो तो संख्या २९१ (ज) 'वृश्चिक' राशि पर हो तो संख्या २९२ (झ) 'धनु' राशि पर हो तो संख्या २९३ (ञ) 'मकर' राशि पर हो तो संख्या २९४ (ट) 'कुम्भ' राशि पर हो तो संख्या २९५ (ठ) 'मीन' राशि पर हो तो संख्या २९६ 'वृष' लग्न में 'शनि' का फलादेश १. 'वृष' लग्न वालों को अपनी जन्मकुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'शनि' का स्थायी-फलादेश उदाहरण-कुण्डली संख्या २९७ से ३०८ के बीच देखना चाहिए। २. 'वृष' लग्न वालों को गोचर-कुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'शनि' का अस्थायी-फलादेश निम्नलिखित उदाहरण-कुण्डलियों में देखना चाहिए। जिस वर्ष में 'शनि'— (क) 'मेष' राशि पर हो तो संख्या २९७ (ख) 'वृष' राशि पर हो तो संख्या २९८ (ग) 'मिथुन' राशि पर हो तो संख्या २९९ (घ) 'कर्क' राशि पर हो तो संख्या ३०० (ङ) 'सिंह' राशि पर हो तो संख्या ३०१ (च) 'कन्या' राशि पर हो तो संख्या ३०२ (छ) 'तुला' राशि पर हो तो संख्या ३०३ (ज) 'वृश्चिक' राशि पर हो तो संख्या ३०४