भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१२८ (झ) 'धनु' राशि पर हो तो संख्या ३०५ (ञ) 'मकर' राशि पर हो तो संख्या ३०६ (ट) 'कुम्भ' राशि पर हो तो संख्या ३०७ (ठ) 'मीन' राशि पर हो तो संख्या ३०८ 'वृष' लग्न में 'राहु' का फलादेश १. 'वृष' लग्न वालों को अपनी जन्मकुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'राहु' का स्थायी-फलादेश उदाहरण-कुण्डली संख्या ३०६ से ३२० के बीच देखना चाहिए। २. 'वृष' लग्न वालों को गोचर-कुण्डली के विभिन्न भागों में स्थित 'राहु' का अस्थायी फलादेश निम्नलिखित उदाहरण-कुण्डलियों में देखना चाहिए— जिस वर्ष में 'राहु'— (क) 'मेष' राशि पर हो तो संख्या ३०६ (ख) 'वृष' राशि पर हो तो संख्या ३१० (ग) 'मिथुन' राशि पर हो तो संख्या ३११ (घ) 'कर्क' राशि पर हो तो संख्या ३१२ (ङ) 'सिंह' राशि पर हो तो संख्या ३१३ (च) 'कन्या' राशि पर हो तो संख्या ३१४ (छ) 'तुला' राशि पर हो तो संख्या ३१५ (ज) 'वृश्चिक' राशि पर हो तो संख्या ३१६ (झ) 'धनु' राशि पर हो तो संख्या ३१७ (ञ) 'मकर' राशि पर हो तो संख्या ३१८ (ट) 'कुम्भ' राशि पर हो तो संख्या ३१६ (ठ) 'मीन' राशि पर हो तो संख्या ३२० 'वृष' लग्न में 'केतु' का फलादेश १. 'वृष' लग्न वालों को अपनी जन्मकुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'केतु' का स्थायी-फलादेश उदाहरण-कुण्डली संख्या ३२१ से ३३२ के बीच देखना चाहिए। २. 'वृष' लग्न वालों को गोचर-कुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'केतु' का अस्थायी-फलादेश निम्नलिखित उदाहरण-कुण्डलियों में देखना चाहिए— जिस वर्ष में 'केतु' (क) 'मेष' राशि पर हो तो संख्या ३२१