भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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१६५ 'वृष' लग्न की कुण्डली के 'द्वादशभाव' स्थित 'केतु' का फलादेश वृष लग्न : द्वादश भाव : केतु बारहवें भाव में शत्रु मंगल की राशि पर स्थित केतु के प्रभाव से जातक की अपना खर्च चलाने में बड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है तथा बाहरी सम्बन्धों से भी परेशानियाँ आती रहती हैं। ऐसा जातक बड़ा परिश्रमी, उद्योगी, धैर्यवान् तथा साहसी होता है।