भारतकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

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१६६ मिथुन लग्न ४ ३ २ ५ 'मिथुन' लग्न १ ६ १२ ७ ९ ११ ८ १० ३३३ [ 'मिथुन' लग्न की कुण्डलियों के विभिन्न भावों में स्थित विभिन्न ग्रहों के फलादेश का पृथक्-पृथक् वर्णन ] 'मिथुन' लग्न का फलादेश 'मिथुन' लग्न में जन्म लेने वाले जातक का चेहरा गोल तथा शरीर का रंग गेहुंआं होता है। वह नृत्य-वाद्य आदि संगीत की कलाओं का प्रेमी, कवि, हास्य-प्रवीण शिल्पज्ञ, विनम्र, परोपकारी, तीर्थप्रेमी, गणितज्ञ, द्यूत-कर्म करने में कुशल, ऐश्वर्य- शाली, धनी, सुखी, चतुर, मधुरभाषी, दानी, सुशील, विषयी, स्त्रियों में व्यासक्त, बहुमित्रवान्, बहु सन्ततिवान्, अनेक प्रकार के भोगों का उपभोग करने वाला, सुन्दर केशों वाला, राजा के समीप रहने वाला तथा राजा द्वारा ही पीड़ा प्राप्त करने वाला होता है। 'मिथुन' लग्न वाला जातक अपनी प्रारंभिक अवस्था में सुखी, मध्यमावस्था में दुःखी तथा अन्तिमावस्था में पुनः सुखोपभोग करने वाला होता है। उसका भाग्यो- दय ३२ से ३५ वर्ष की आयु के बीच होता है। इस लग्न वाला जातक मध्यम आयु प्राप्त करता है।