भारतकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

DevanagariHindipublished638 पृष्ठ

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१६७ 'मिथुन' लग्न वालों की अपनी जन्मकुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित विभिन्न ग्रहों का स्थायी फलादेश आगे दी गई उदाहरण-कुण्डलियों में संख्या ३३४ से ४४१ के बीच देखना चाहिए । गोचर कुण्डली के ग्रहों का फलादेश किन उदाहरण-कुण्डलियों में देखें, इसे आगे लिखे अनुसार समझ लेना चाहिए । 'मिथुन' लग्न में 'सूर्य' का फलादेश १. 'मिथुन' लग्न वालों को अपनी जन्मकुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'सूर्य' का स्थायी फलादेश उदाहरण-कुण्डली संख्या ३३४ से ३४५ के बीच देखना चाहिए। २. 'मिथुन' लग्न वालों की गोचर-कुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'सूर्य' का अस्थायी फलादेश, निम्नलिखित उदाहरण-कुण्डलियों में देखना चाहिए— जिस महीने में 'सूर्य'— (क) 'मेष' राशि पर ही तो संख्या ३३४ (ख) 'वृष' राशि पर हो तो संख्या ३३५ (ग) 'मिथुन' राशि पर हो तो संख्या ३३६ (घ) 'कर्क' राशि पर हो तो संख्या ३३७ (ङ) 'सिंह' राशि पर हो तो संख्या ३३८ (च) 'कन्या' राशि पर हो तो संख्या ३३६ (छ) 'तुला' राशि पर हो तो संख्या ३४० (ज) 'वृश्चिक' राशि पर ही तो संख्या ३४१ (झ) 'धनु' राशि पर हो तो संख्या ३४२ (ञ) 'मकर' राशि पर हो तो संख्या ३४३ (ट) 'कुम्भ' राशि पर हो तो संख्या ३४४ (ठ) 'मीन' राशि पर हो तो संख्या ३४५ 'मिथुन' लग्न में 'चन्द्रमा' का फलादेश १. 'मिथुन' लग्न वालों की अपनी जन्मकुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'चन्द्रमा' का फलादेश उदाहरण-कुण्डली संख्या ३४६ से ३५७ के बीच देखना चाहिए ।