भारतकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

DevanagariHindipublished638 पृष्ठ

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२०२ 'मिथुन' लग्न की कुण्डली के 'पंचमभाव' स्थित 'राहु' का फलादेश मिथुन लग्न : पंचमभाव : राहू पाँचवें भाव में मित्र शुक्र की राशि पर स्थित राहु के प्रभाव में जातक को अनेक कठि- नाइयो के बाद विद्या तथा बुद्धि के क्षेत्र में सफ- लता मिलती है, परन्तु सन्तान-पक्ष में कष्ट ही बना रहता है। ऐसा व्यक्ति गुप्त युक्तियों का ज्ञाता- बुद्धिमान, असत्यवादी, प्रभावोत्पादक तथा अनेक प्रकार की चिंताओं से ग्रस्त होता है। ४२२ 'मिथुन' लग्न की कुण्डली के 'षष्ठभाव' स्थित 'राहु' का फलादेश मिथुन लग्न : षष्ठभाव : राहू छठे भाव में शत्रु मंगल की राशि पर स्थित राहू के प्रभाव से जातक शत्रु पर अपना विशेष प्रभाव बनाये रखता है तथा उन पर विजय पाता है। ऐसा व्यक्ति अपनी कमजोरियों को प्रकट नहीं होने देता तथा बड़ा साहसी, धैर्यवान, चतुर, पराक्रमी तथा गुप्त युक्तियों का जानकार होता है। ४२३ मिथुन' लग्न की कुण्डली में 'सप्तमभाव' स्थित 'राहु' का फलादेश मिथुन लग्न : सप्तमभाव : राहू सातवें भाव में शत्रु गुरु की राशि पर स्थित राहू के प्रभाव से जातक की स्त्री को बहुत कष्ट प्राप्त होता है तथा व्यवसाय के क्षेत्र में भी बड़ी कठिनाइयां आती रहती हैं। ऐसे व्यक्ति की मूलेन्द्रिय में भी कोई विकार होता है। यह गुप्त युक्तियों तथा असत्य- भाषण आदि के अनुचित तरीकों से भी अपना ४२४ स्वार्थ-साधन करने से नहीं चूकता