भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२०३ 'मिथुन' लग्न की कुण्डली के 'अष्टमभाव' स्थित 'राहु' का फलादेश मिथुन लग्न : अष्टमभाव : राहु आठवें भाव में मित्र शनि की राशि पर स्थित राहु के प्रभाव से जातक की पुरातत्त्व एवं आयु के विषय में अनेक प्रकार के संकटों का सामना करना पड़ता है। उसके पेट के निम्न भाग में कोई विकार भी होता है। ऐसा व्यक्ति कठिन परिश्रम तथा गुप्त युक्तियों के गल पर सफलता पाने के लिए प्रयत्न- शील रहता है तथा अपनी कठिनाइयों के विषय में किसी की पता नहीं चलने देता। 'मिथुन' लग्न की कुण्डली के 'नवमभाव' स्थित 'राहु' का फलादेश मिथुन लग्न : नवमभाव : राहु नवें भाव में मित्र शनि की राशि पर स्थित राहु के प्रभाव से जातक की भाग्योन्नति में अनेक कठिनाइयां आती हैं। वह अपने परिश्रम तथा गुप्त युक्तियों के बल पर भाग्य की वृद्धि तो करता है, परन्तु पूर्ण सुख-सम्मान प्राप्त नहीं कर पाता। उसका धर्म-पालन भी ढोंग-जैसा ही होता है। कहीं बहुत बाद में उसे थोड़ी-सी सफलता मिल पाती है। 'मिथुन' लग्न की कुण्डली के 'दशमभाव' स्थित 'राहु' का फलादेश मिथुन लग्न : दशमभाव : राहु दसवें भाव में शत्रु गुरु की राशि पर स्थित राहु के प्रभाव से जातक की राज्य, पिता तथा व्यवसाय के क्षेत्र में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है तथा अत्यन्त कठिन परिश्रम के बाद ही थोड़ी-बहुत सफलता मिल पाती है। ऐसे व्यक्ति पर बार-बार संकट आते रहते हैं, अन्त में थोड़ी- तो सफलता भी मिलती है।