भारतकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

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२१२ 'कर्क' लग्न में 'बुध' का फलादेश १—'कर्क' लग्न वालों को अपनी जन्मकुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'बुध' का स्थायी फलादेश उदाहरण-कुण्डली संख्या ४७६ से ४६० के बीच देखना चाहिए। २—'कर्क' लग्न वालों को गोचर-कुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'बुध' का अस्थायी फलादेश निम्नलिखित उदाहरण-कुण्डलियों में देखना चाहिए— जिस महीने में 'बुध'— (क) 'मेष' राशि पर स्थित हो तो संख्या ४७६ (ख) 'वृष' राशि पर स्थित हो तो संख्या ४८० (ग) 'मिथुन' राशि पर स्थित हो तो संख्या ४८१ (घ) 'कर्क' राशि पर स्थित हो तो संख्या ४८२ (ङ) 'सिंह' राशि पर स्थित हो तो संख्या ४८३ (च) 'कन्या' राशि पर स्थित हो तो संख्या ४८४ (छ) 'तुला' राशि पर स्थित हो तो संख्या ४८५ (ज) 'वृश्चिक' राशि पर स्थित हो तो संख्या ४८६ (झ) 'धनु' राशि पर स्थित हो तो संख्या ४८७ (ञ) 'मकर' राशि पर स्थित हो तो संख्या ४८८ (ट) 'कुम्भ' राशि पर स्थित तो हो संख्या ४८६ (ठ) 'मीन' राशि पर स्थित हो तो संख्या ४६० 'कर्क' लग्न में 'गुरु' का फलादेश १—'कर्क' लग्न वालों को अपनी जन्मकुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'गुरु' का स्थायी फलादेश उदाहरण-कुण्डली संख्या ४६१ से ५०२ के बीच देखना चाहिए। २—'कर्क' लग्न वालों को गोचर-कुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'गुरु' का अस्थायी फलादेश निम्नलिखित उदाहरण-कुण्डलियों में देखना चाहिए— जिस वर्ष में 'गुरु'— (क) 'मेष' राशि पर स्थित हो तो संख्या ४६१ (ख) 'वृष' राशि पर स्थित हो तो संख्या ४६२ (ग) 'मिथुन' राशि पर स्थित हो यो संख्या ४६३ (घ) 'कर्क' राशि पर स्थित हो तो संख्या ४६४ (ङ) 'सिंह' राशि पर स्थित हो तो संख्या ४६५ (ज) 'कन्या' राशि पर स्थित हो तो संख्या ४६६