भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२१३ (छ) 'तुला' राशि पर स्थित हो तो संख्या ४६७ (ज) 'वृश्चिक' राशि पर स्थित हो तो संख्या ४६८ (झ) 'धनु' राशि पर स्थित हो तो संख्या ४६६ (ञ) 'मकर' राशि पर स्थित हो तो संख्या ५०० (ट) 'कुम्भ' राशि पर स्थित हो तो संख्या ५०१ (ठ) 'मीन' राशि पर स्थित हो तो संख्या ५०२ 'कर्क' लग्न में 'शुक्र' का फलादेश १—'कर्क' लग्न वालों को अपनी जन्मकुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'शुक्र' का स्थायी फलादेश उदाहरण-कुण्डली संख्या ५०३ से ५१४ के बीच देखना चाहिए। २—'कर्क' लग्न वालों को गोचर-कुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'शुक्र' का अस्थायी फलादेश निम्नलिखित उदाहरण-कुण्डलियों में देखना चाहिए— जिस महीने में 'शुक्र'— (क) 'मेष' राशि पर स्थित हो तो संख्या ५०३ (ख) 'वृष' राशि पर स्थित हो तो संख्या ५०४ (ग) 'मिथुन' राशि पर स्थित हो तो संख्या ५०५ (घ) 'कर्क' राशि पर स्थित हो तो संख्या ५०६ (ङ) 'सिंह' राशि पर स्थित हो तो संख्या ५०७ (च) 'कन्या' राशि पर स्थित हो तो संख्या ५०८ (छ) 'तुला' राशि पर स्थित हो तो संख्या ५०६ (ज) 'वृश्चिक' राशि पर स्थित हो तो संख्या ५१० (झ) 'धनु' राशि पर स्थित हो तो संख्या ५११ (ञ) 'मकर' राशि पर स्थित हो तो संख्या ५१२ (ट) 'कुम्भ' राशि पर स्थित हो तो संख्या ५१३ (ठ) 'मीन' राशि पर स्थित हो तो संख्या ५१४ 'कर्क' लग्न में 'शनि' का फलादेश १—'कर्क' लग्न वालों को अपनी जन्मकुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'शनि' का स्थायी फलादेश उदाहरण-कुण्डली संख्या ५१५ से ५२६ के बीच देखना चाहिए। २—'कर्क' लग्न वालों को गोचर-कुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'शनि'