भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२१४ का अस्थायी फलादेश निम्नलिखित उदाहरण-कुण्डलियों में देखना चाहिए— जिस वर्ष में 'शनि'— (क) 'मेष' राशि पर स्थित हो तो संख्या ५१५ (ख) 'वृष' राशि पर स्थित हो तो संख्या ५१६ (ग) 'मिथुन' राशि पर स्थित हो तो संख्या ५१७ (घ) 'कर्क' राशि पर स्थित हो तो संख्या ५१८ (ङ) 'सिंह' राशि पर स्थित हो तो संख्या ५१६ (च) 'कन्या' राशि पर स्थित हो तो संख्या ५२० (छ) 'तुला' राशि पर स्थित हो तो संख्या ५२१ (ज) 'वृश्चिक' राशि पर स्थित हो तो संख्या ५२२ (झ) 'धनु' राशि पर स्थित हो तो संख्या ५२३ (ञ) 'मकर' राशि पर स्थित हो तो संख्या ५२४ (ट) 'कुम्भ' राशि पर स्थित हो तो संख्या ५२५ (ठ) 'मीन' राशि पर स्थित हो तो संख्या ५२६ 'कर्क' लग्न में 'राहु' का फलादेश १—'कर्क' लग्न वालों को अपनी जन्मकुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'राहु' का स्थायी फलादेश उदाहरण-कुण्डली संख्या ५२७ से ५३८ के बीच देखना चाहिए। २—'कर्क' लग्न वालों को गोचर-कुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'राहु' का अस्थायी फलादेश निम्नलिखित उदाहरण-कुण्डलियों में देखना चाहिए— जिस वर्ष में 'राहु'— (क) 'मेष' राशि पर स्थित हो तो संख्या ५२७ (ख) 'वृष' राशि पर स्थित हो तो संख्या ५२८ (ग) 'मिथुन' राशि पर स्थित हो तो संख्या ५२६ (घ) 'कर्क' राशि पर स्थित हो तो संख्या ५३० (ङ) 'सिंह' राशि पर स्थित हो तो संख्या ५३१ (च) 'कन्या' राशि पर स्थित हो तो संख्या ५३२ (छ) 'तुला' राशि पर स्थित हो तो संख्या ५३३ (ज) 'वृश्चिक' राशि पर स्थित हो तो संख्या ५३४ (झ) 'धनु' राशि पर स्थित हो तो संख्या ५३५ (ञ) 'मकर' राशि पर स्थित हो तो संख्या ५३६ (ट) 'कुम्भ' राशि पर स्थित हो तो संख्या ५३७ (ठ) 'मीन' राशि पर स्थित हो तो संख्या ५३८