भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२१७ 'कर्क' लग्न को कुण्डली के 'पंचमभाव' स्थित 'सूर्य' का फलादेश कर्क लग्न : पंचमभाव : सूर्य पाँचवें भाव में मित्र मंगल की राशि पर स्थित सूर्य के प्रभाव से जातक के सन्तान-सुख में बाधा आती है, परन्तु एक सन्तान अत्यन्त प्रभावशालिनी होती है । विद्या तथा बुद्धि के क्षेत्र में पूर्ण सफलता प्राप्त होती है तथा धन की वृद्धि की होती है । सातवीं शत्रुदृष्टि से एकादशभाव को देखने से आमदनी अच्छी रहती है। ऐसा जातक स्पष्ट वक्ता तथा उग्र स्वभाव का होता है । ४४७ 'कर्क' लग्न की कुण्डली के 'षष्ठभाव' स्थित 'सूर्य' का फलादेश कर्क लग्न : षष्ठभाव : सूर्य छठें भाव में मित्र गुरु की राशि पर स्थित सूर्य के प्रभाव से जातक शत्रु-पक्ष पर अत्यन्त प्रभाव रखता है, परन्तु धन तथा कुटुम्ब के सुख में कमी रहती है । सातवीं मित्रदृष्टि से द्वादशभाव को देखने से बाहरी सम्बन्धो से लाभ होता है तथा खर्च अधिक [