भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२४५ 'सिंह' लग्न में 'बुध' का फलादेश १. 'सिंह' लग्न वालों को अपनी जन्मकुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'बुध' का स्थायी फलादेश उदाहरण-कुण्डली संख्या ५८८ से ५६६ के बीच देखना चाहिए। २. 'सिंह' लग्न वालों को गोचर-कुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'बुध' का अस्थायी फलादेश निम्नलिखित उदाहरण-कुण्डलियों में देखना चाहिए— जिस महीने में 'बुध'— (क) 'मेष' राशि पर हो तो संख्या ५८८ (ख) 'वृष' राशि पर हो तो संख्या ५८६ (ग) 'मिथुन' राशि पर हो तो संख्या ५६० (घ) 'कर्क' राशि पर हो तो संख्या ५६१ (ङ) 'सिंह' राशि पर हो तो संख्या ५६२ (च) 'कन्या' राशि पर हो तो संख्या ५६३ (छ) 'तुला' राशि पर हो तो संख्या ५६४ (ज) 'वृश्चिक' राशि पर हो तो संख्या ५६५ (झ) 'धनु' राशि पर हो तो संख्या ५६६ (ञ) 'मकर' राशि पर हो तो संख्या ५६७ (ट) 'कुम्भ' राशि पर हो तो संख्या ५६८ (ठ) 'मीन' राशि पर हो तो संख्या ५६६ 'सिंह' लग्न में 'गुरु' का फलादेश १. 'सिंह' लग्न वालों को अपनी जन्मकुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'गुरु' का स्थायी फलादेश उदाहरण-कुण्डली संख्या ६०० से ६११ के बीच देखना चाहिए। २. 'सिंह' लग्न वालों की गोचर-कुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'गुरु' का अस्थायी फलादेश निम्नलिखित उदाहरण-कुण्डलियों में देखना चाहिए— जिस वर्ष में 'गुरु'— (क) 'मेष' राशि पर हो तो संख्या ६०० (ख) 'वृष' राशि पर हो तो संख्या ६०१ (ग) 'मिथुन' राशि पर हो तो संख्या ६०२ (घ) 'कर्क' राशि पर हो तो संख्या ६०३