भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२५६ (ङ) 'सिंह' राशि पर हो तो संख्या ६०४ (च) 'कन्या' राशि पर हो तो संख्या ६०५ (छ) 'तुला' राशि पर हो तो संख्या ६०६ (ज) 'वृश्चिक' राशि पर हो तो संख्या ६०७ (झ) 'धनु' राशि पर हो तो संख्या ६०८ (ञ) 'मकर' राशि पर हो तो संख्या ६०६ (ट) 'कुम्भ' राशि पर हो तो संख्या ६१० (ठ) 'मीन' राशि पर हो तो संख्या ६११ 'सिंह' लग्न में 'शुक्र' का फलादेश १. 'सिंह' लग्न वालों को अपनी जन्मकुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'शुक्र' का स्थायी फलादेश उदाहरण-कुण्डली संख्या ६१२ से ६२३ के बीच देखना चाहिए । 'सिंह' लग्नवालों की गोचर-कुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'शुक्र' का अस्थायी फलादेश निम्नलिखित उदाहरण-कुण्डलियों में देखना चाहिए— जिस महीने में 'शुक्र'— (क) 'मेष' राशि पर हो तो संख्या ६१२ (ख) 'वृष' राशि पर हो तो संख्या ६१३ (ग) 'मिथुन' राशि पर हो तो संख्या ६१४ (घ) 'कर्क' राशि पर हो तो संख्ता ६१५ (ङ) 'सिंह' राशि पर हो तो संख्या ६१६ (च) 'कन्या' राशि पर हो तो संख्या ६१७ (छ) 'तुला' राशि पर हो तो संख्या ६१८ (ज) 'वृश्चिक' राशि पर हो तो संख्या ६१६ (झ) 'धनु' राशि पर हो तो संख्या ६२० (ञ) 'मकर' राशि पर हो तो संख्या ६२१ (ट) 'कुम्भ' राशि पर हो तो संख्या ६२२ (ठ) 'मीन' राशि पर हो तो संख्या ६२३ 'सिंह' लग्न में 'शनि' का फलादेश १. 'सिंह' लग्नवालों को अपनी जन्मकुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित शनि' का स्थायी फलादेश उदाहरण-कुण्डली संख्या ६२४ से ६३५ के बीच देखना चाहिए ।