भारतकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

DevanagariHindipublished638 पृष्ठ

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२८३ 'सिंह' लग्न की कुण्डली के 'द्वितीयभाव' स्थित 'शनि' का फलादेश सिंह लग्न : द्वितीयभाव : शनि दूसरे भाव में मित्र बुध की राशि पर स्थित शनि के प्रभाव से जातक को धन तथा कुटुम्ब के क्षेत्र में हानि-लाभ दोनों की प्राप्ति होती है। स्त्री तथा व्यवसाय के क्षेत्र में बाधाएँ आती हैं। तीसरी शत्रुदृष्टि से चतुर्थभाव को देखने से माता, भूमि एवं भवन के सुख में कुछ कमी रहती है। सातवीं शत्रुदृष्टि से अष्टमभाव को देखने से आयु तथा पुरातत्त्व के विषय में असन्तोष रहता है। दसवीं मित्रदृष्टि से एकादश भाव को देखने से आमदनी में वृद्धि होती है। ऐसे व्यक्ति का जीवन सुख-दुःखपूर्ण बना रहता है। 'सिंह' लग्न की कुण्डली के 'तृतीयभाव' स्थित 'शनि' का फलादेश सिंहलग्न : तृतीयभाव : शनि तीसरे भाव में मित्र शुक्र की राशि पर स्थित शनि के प्रभाव से जातक के प्रभाव तथा पराक्रम में बहुत वृद्धि होती है तथा भाई-बहिनों का सुख भी मिलता है। शत्रु-पक्ष पर विजय मिलती है तथा स्त्री-पक्ष पर विशेष प्रभाव बना रहता है। दैनिक आमदनी भी अच्छी रहती है। तीसरी शत्रु- दृष्टि से पंचमभाव को देखने से सन्तान, विद्या तथा बुद्धि के क्षेत्र में कुछ कठिनाइयाँ रहती हैं। सातवीं नीचदृष्टि से नवम भाव को देखने से भाग्य तथा धर्म के क्षेत्र में कमी आती है। दसवीं शत्रुदृष्टि से द्वादशभाव को देखने से खर्च अधिक रहता है, जिसके कारण परेशानी भी रहती है। 'सिंह' लग्न की कुण्डली के 'चतुर्थभाव' स्थित 'शनि' का फलादेश सिंहलग्न : चतुर्थभाव : शनि चौथे भाव में शत्रु मंगल की राशि पर स्थित शनि के प्रभाव से जातक की माता, भूमि तथा भवन के सुख में त्रुटिपूर्ण सफलता मिलती है। स्त्री तथा दैनिक व्यवसाय के क्षेत्र में भी असन्तोष रहता है। तीसरी दृष्टि से स्वराशि में षष्ठभाव को देखने से शत्रु पक्ष पर प्रभाव रहता है, परन्तु कुछ कठिनाइयों के साथ शत्रुओं पर विजय मिलती है। सातवीं मित्रदृष्टि से दशमभाव को देखने से पिता, राज्य तथा व्यवसाय के क्षेत्र में सुख, सम्मान तथा सफलता की प्राप्ति होती है। दसवीं दृष्टि से प्रथमभाव को देखने से शरीर में रोग रहता है तथा सौन्दर्य में कुछ कमी आती है।